Magh Mela Kalpavas Niyam: माघ मेले की शुरुआत जल्द ही होने वाली है। इस मेले के दौरान कल्पवास करने का विधान है। ऐसे में आइए जानते हैं क्या होता है कल्पवास और इसके नियम के बारे में।
Magh Mela Kalpavas Niyam: साल 2026 में माघ मेले की शुरुआत 3 जनवरी 2026 से होने जा रही है। इसी दिन पौष पूर्णिमा का व्रत भी रखा जाएगा। माघ मेला हर साल माघ मास में प्रयागराज में लगता है। इस मेले के दौरान गंगा स्नान और दान करने की परंपरा है। शास्त्रों में माघ मास का कफी महत्व बताया गया है। इस महीने को मोक्ष प्रदान करने वाला महीना बताया गया है। माघ मेले के दौरान कल्पवास करने की परंपरा भी बहुत लंबे समय से चली आ रही है। कल्पवास पूरे एक महीने की लिए किया जाता है। शास्त्रों में कल्पवास का बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। इसके लिए बहुत सारे कठोर नियम भी बनाए गए हैं। आइए जानते हैं क्या होता है कल्पवास और इसके नियम के बारे में।
हिंदू धर्मग्रंथो में कल्पवास को सन्यास और वानप्रस्थ आश्रम के सामान माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जो भी लोग सन्यास धारण करना चाहते हैं उन लोगों को माघ मेले के दौरान एक महीने के लिए कल्पवास करने का विधान होता है। कल्पवास के समय एक महीने तक गंगा तट के पास रहने का विधान है। कल्पवास अधिकतर बूढ़े लोग करते हैं, लेकिन शास्त्रों में इसके लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। कल्पवास कोई भी व्यक्ति कर सकता है। कल्पवास के समय में व्यक्ति को कठोर नियम का पालना करना होता है।