मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और सकारात्मक जीवन की शुरुआत का अवसर है। सही नियमों का पालन और गलतियों से बचाव करके आप इस दिन का पूरा पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।
मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और ऊर्जा से भरा पर्व है। इस दिन सूर्यदेव उत्तरायण होते हैं और मकर राशि में प्रवेश करते हैं। यही कारण है कि मकर संक्रांति को स्नान, दान और पुण्य का महापर्व माना जाता है। भारत के अलग-अलग राज्यों में इसे अलग-अलग नामों जैसे पोंगल, उत्तरायण, खिचड़ी और बिहू से मनाया जाता है। इस साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन कुछ नियमों का पालन करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं, लेकिन कुछ गलतियां ऐसी भी हैं जो इस शुभ दिन का फल नकारात्मक बना सकती हैं।
मकर संक्रांति का संबंध सूर्यदेव से है। इस दिन सूर्य पूजा, गंगा स्नान, तिल-गुड़ का सेवन और दान-पुण्य करने से सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। इसे नए आरंभ और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
स्नान के बिना भोजन न करें
मकर संक्रांति के दिन पवित्र स्नान के बाद ही भोजन करना चाहिए। मान्यता है कि बिना स्नान भोजन करने से वह अन्न अशुद्ध हो जाता है और पुण्य नष्ट होता है।
तेल का दान न करें
हालांकि दान का विशेष महत्व है, लेकिन मकर संक्रांति के दिन तेल का दान अशुभ माना गया है। ऐसा करने से घर में बीमारी और नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है।
सफेद चावल और नुकीली चीजों का दान न करें
इस दिन सफेद चावल, चाकू, कैंची या अन्य नुकीली वस्तुएं दान करने से बचना चाहिए। इन्हें तनाव और विवाद का कारण माना गया है।
तामसिक भोजन और शराब से दूरी रखें
मकर संक्रांति पर मांस-मदिरा, लहसुन-प्याज जैसे तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे सेहत और मानसिक शांति दोनों प्रभावित होती हैं।
ब्राह्मण और जरूरतमंद को खाली हाथ न लौटाएं
यदि कोई ब्राह्मण या जरूरतमंद आपके द्वार आए, तो उसे यथाशक्ति दान जरूर दें। किसी का अपमान करना या खाली हाथ लौटाना पाप माना गया है।