दिशाएं केवल मान्यताएं नहीं, बल्कि ऊर्जा का विज्ञान हैं। सही दिशा में काम, भोजन और विश्राम करने से स्वास्थ्य, धन और सफलता बढ़ती है। थोड़ी सी समझ आपके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।
हमारे शास्त्रों और वास्तु–ज्योतिष में दिशाओं (Directions) का विशेष महत्व बताया गया है। अक्सर बुज़ुर्ग कहते हैं—दक्षिण की ओर पैर करके मत सोओ, पूर्व की ओर मुख करके पढ़ो या भोजन करो। इसके पीछे केवल मान्यता नहीं, बल्कि सूर्य, प्रकाश और ऊर्जा का गहरा विज्ञान छिपा है। सही दिशा में सही काम करने से जीवन में लाभ मिलता है, जबकि गलत दिशा नुकसान पहुंचा सकती है।
हर दिशा पर सूर्य के प्रकाश और चुंबकीय ऊर्जा (Magnetic Energy) का अलग असर होता है। यही ऊर्जा हमारे मन, शरीर और भाग्य को प्रभावित करती है। बिना समझे दिशाओं का उपयोग करने से स्वास्थ्य, धन और रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
पूर्व दिशा को सबसे पवित्र और शक्तिशाली माना गया है। इस दिशा पर सूर्य और गुरु (बृहस्पति) का प्रभाव रहता है।
पूर्व की ओर मुख करके पूजा, ध्यान और पढ़ाई करना अत्यंत लाभकारी होता है।
अगर आप जीवन में नाम, यश और सम्मान चाहते हैं, तो पूर्व दिशा की ओर मुख करके भोजन करना भी शुभ माना जाता है। यह दिशा सुरक्षा और सकारात्मकता देती है।
पश्चिम दिशा को ऊर्जावान माना जाता है, जहां शनि का प्रभाव अधिक रहता है।
पश्चिम की ओर मुख करके प्रार्थना या ध्यान करने से जल्दी फल मिलता है।
लेकिन इस दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से संघर्ष बढ़ सकता है और पश्चिम की ओर सिर करके सोने से स्वास्थ्य और धन की हानि हो सकती है।
उत्तर दिशा को धन और करियर की दिशा कहा गया है। इस पर बुध (Mercury) का प्रभाव अधिक होता है।
व्यवसाय, ऑफिस का काम और पूजा अगर उत्तर दिशा की ओर मुख करके की जाए, तो आर्थिक लाभ के योग बनते हैं।
उत्तर की ओर मुख करके भोजन करने से कम संघर्ष में अधिक सफलता मिलती है।
दक्षिण दिशा को अक्सर गलत समझा जाता है, जबकि यह आयु और स्वास्थ्य से जुड़ी है।
दक्षिण की ओर मुख करके सामान्य भोजन करना उचित नहीं माना जाता, इससे पेट और मानसिक समस्याएं हो सकती हैं।
यह दिशा पितरों की मानी जाती है, इसलिए पितृ पूजा या श्राद्ध के समय दक्षिण की ओर मुख करना शुभ होता है।
पृथ्वी के उत्तर और दक्षिण ध्रुव चुंबकीय होते हैं। दक्षिण की ओर पैर करके सोने से शरीर की ऊर्जा बाहर निकलने लगती है, जिससे बीमारी का खतरा बढ़ता है। यही कारण है कि मृत्यु के बाद शरीर के पैर दक्षिण की ओर रखे जाते हैं।