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Holi 2026: शास्त्र के अनुसार इन लोगों को नहीं देखनी चाहिए जलती हुई होलिका, लग सकता है दोष

Holi 2026: होली 2026 में भद्रा और चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है। शास्त्रों के अनुसार गर्भवती महिलाएं, नवविवाहित दुल्हन, इकलौती संतान वाले माता-पिता समेत 6 लोगों को होलिका दहन की अग्नि से दूर रहना चाहिए। जानें कारण और सावधानियां।

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भारत

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Manoj Vashisth

Feb 27, 2026

Holi 2026

Holi 2026 : होलिका दहन की आग न देखें ये 5 लोग, वरना लग सकता है बड़ा दोष

Holi 2026: होली का त्योहार खुशियों और रंगों का संगम है, इस बार की होली (2 मार्च 2026) अपने साथ कुछ खास ज्योतिषीय चुनौतियां भी लेकर आ रही है। इस बार होलिका दहन के समय जहां भद्रा का साया मंडरा रहा है, वहीं अगले ही दिन यानी 3 मार्च को चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है। ऐसे में होलिका दहन की अग्नि के दर्शन और पूजा को लेकर सावधानी बरतना बहुत जरूरी हो गया है।

होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, लेकिन शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार, इसकी अग्नि से निकली ऊर्जा हर किसी के लिए शुभ नहीं होती। आइए जानते हैं वे कौन से 6 लोग हैं जिन्हें इस बार अग्नि से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

इन लोगों को नहीं देखनी चाहिए होलिका की आग

  1. इकलौती संतान वाले माता-पिता पुरानी मान्यताओं के अनुसार, जिन माता-पिता की सिर्फ एक ही संतान है, उन्हें होलिका दहन की जलती हुई अग्नि को देखने से बचना चाहिए। ऐसे लोग अपनी जगह परिवार के किसी बड़े-बुजुर्ग से पूजा संपन्न करा सकते हैं।
  2. नवजात और छोटे बच्चे जिन बच्चों का अभी मुंडन संस्कार नहीं हुआ है, उन्हें होलिका दहन के पास बिल्कुल न ले जाएं। विज्ञान कहता है कि धुएं से बच्चों को सांस की तकलीफ हो सकती है, वहीं ज्योतिष के अनुसार बच्चे नकारात्मक ऊर्जा को जल्दी पकड़ लेते हैं।
  3. ई नवेली दुल्हन शादी के बाद की पहली होली पर दुल्हन को जलती हुई होलिका नहीं देखनी चाहिए। परंपरा कहती है कि अगर दुल्हन पहली होली अपने मायके में मनाए और होलिका की अग्नि से दूर रहे, तो उसके नए वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
  4. बीमार और कमजोर दिल वाले लोग भीड़, तेज धुआं और चटकती आग का माहौल उन लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है जिन्हें अस्थमा या हृदय संबंधी परेशानियां हैं। साथ ही, जिन्हें आग से डर लगता है (Pyrophobia), उन्हें भी दूर रहना चाहिए।
  5. गर्भवती महिलाएं गर्भावस्था के दौरान तेज आग की लपटें, शोर-शराबा और धुएं से बचना सेहत के लिहाज से भी जरूरी है। आध्यात्मिक रूप से माना जाता है कि होलिका की जलती अग्नि की ऊर्जा गर्भ में पल रहे शिशु के लिए बहुत प्रभावशाली होती है, जिससे बचना ही बेहतर है।
  6. सास-बहू की जोड़ी लखनऊ और उत्तर भारत के कई हिस्सों में यह मान्यता बहुत मजबूत है कि सास और बहू को एक साथ होलिका दहन नहीं देखना चाहिए। माना जाता है कि इससे उनके बीच भविष्य में वैचारिक मतभेद या कलह बढ़ सकती है।

क्यों है इस बार ज्यादा सावधानी की जरूरत?

साल 2026 की होली पर भद्रा और चंद्र ग्रहण का यह दुर्लभ संयोग बहुत कम देखने को मिलता है।

भद्रा का वास: भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना जाता है, इसलिए शुभ मुहूर्त का पालन करना इस बार अनिवार्य है।

ग्रहण का प्रभाव: ग्रहण से ठीक पहले का समय 'सूतक' जैसा प्रभाव देता है, जिससे नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है।

जीजा-साला और मामा-भांजा: इन रिश्तों को भी एक साथ अग्नि दर्शन से बचना चाहिए ताकि संबंधों में कड़वाहट न आए।

होलिका दहन सिर्फ लकड़ी जलाने का काम नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा के शुद्धिकरण की प्रक्रिया है। अपनी सेहत और धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाएं।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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