कोरोना वायरस की वजह से ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर एक बार फिर से संकट के बादल घिर आए हैं।
नई दिल्ली: भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर ( Automobile Sector ) साल 2019 की शुरुआत से दो दशकों की सबसे बड़ी मंदी के दौर से गुजर रहा है ऐसे में साल 2020 से इस मंदी से राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी। अब कोरोना वायरस की वजह से ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर एक बार फिर से संकट के बादल घिर आए हैं। अब तो आलम ये है कि कोरोना वायरस के खौफ की वजह से वित्त वर्ष 2020 में ऑटोमोबाइल सेक्टर के हालात सुधरते हुए नहीं दिखाई दे रहे हैं ( Corona virus affecting automobile sector )।
आपको बता दें कि सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन ( Society of Indian Automobile Manufacturers ) की तरफ से जानकारी दी गई है कि कोरोना वायरस की वजह से ऑटो इंडस्ट्री का प्रोडक्शन गंभीर रुप से प्रभावित हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में तकरीबन 10 प्रतिशत रॉ मटीरियल चीन से मंगाया जाता है।
वाहनों का प्रोडक्शन बुरी तरह से प्रभावित
चीन से वाहनों के निर्माण के लिए जितना भी कच्चा माल मंगवाया जाता है उसकी सप्लाई अब पहले के मुकाबले बेहद ही कम हो रहा है जिससे भारत में वाहनों का प्रोडक्शन प्रभावित हो रहा है। इसकी वजह से मंदी से राहत नहीं मिल पा रही है, जबकि ऑटो सेक्टर को ऐसी उम्मीद नहीं थी। 1 अप्रैल से देश भर में बीएस6 नॉर्म्स लागू होने वाले हैं कोरोना वायरस की वजह से इन वाहनों का प्रोडक्शन प्रभावित हो रहा है।
आपको बता दें कि कोरोना वायरस की वजह से वाहनों के जरूरी पार्ट्स चीन से भारत में सप्लाई नहीं हो पा रहे हैं और इसकी वजह से भारत में पैसेंजर वेहिकल, कॉमर्शियल वेहिकल, थ्री वेहिकल, टू-वेहिकल और इलेक्ट्रिक वेहिकल समेत सभी सेगमेंट के प्रोडक्शन पर असर पड़ेगा।
ऑटोमोबाइल सेक्टर वाहनों के जरूरी पार्ट्स की पूर्ति करने के लिए घरेलू स्तर पर विकल्प तलाशने में जुट गया है, जिससे वाहनों के प्रोडक्शन को सुचारु रूप से जारी रखा जा सके और मंदी के दौर से निपटने में मदद मिल सके।