मंदिर-मस्जिद विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में पांच दिसंबर से शुरू होगी
अयोध्या. राम जन्मभूमि मंदिर व मस्जिद विवाद का सर्वमान्य हल के लिए अयोध्या के शनि धाम पीठ में हवन किया गया, जिसमें हिंदू-मुसलमान और सिख धर्मों के लोगों ने भाग लिया। मंदिर-मस्जिद विवाद के हल के लिए कई प्रकार के प्रयास किये गए। अयोध्या के संतों-महंतों व मुस्लिमों के बीच आपसी बैठक की गई। इस मामले से जुड़े मंदिर-मस्जिद के पक्षकारों की बात हुई, लेकिन अभी तक मंदिर मस्जिद विवाद का हल के लिए कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका है। इस मसले के सम्बन्ध में सभी पक्षकारों ने सिर्फ कोर्ट के फैसले को मानना उचित समझा है।
पांच दिसंबर से कोर्ट में शुरू होने वाली सुनवाई को लेकर अयोध्या में सभी धर्मो के पवित्र स्थल पर धर्म परंपरा के अनुसार पूजा पाठ शुरू हो गया है, ताकि सुप्रीम कोर्ट से होने वाले फैसले को सभी सहस्त्र स्वीकार करें और देश में अमन चैन बना रहे।
ताकि आपसी सौहार्द बना रहे
इस कार्यक्रम के आयोजक हरिदयाल मिश्र ने बताया कि यह कार्यक्रम देश में आपसी सौहार्द बना रहे, इसके लिए हम लोग अपने अपने धर्म के अनुसार अपने ईस्ट की पूजा और हवन पूजन कर रहे हैं। यह कार्यक्रम सात दिन तक चलेगा। उन्होंने बताया कि इसी क्रम से मस्जिदों और गुरुद्वारा में भी किया जायेगा कि हम लोग सभी एक हो जायें। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य रामजन्मभूमि का सर्व मान्य हल हो, इसके लिए किया गया।
मुस्लिम नौजवान बबलू ने बताया कि हम सभी धर्म के लोग एक हैं तथा देश में शांति-व्यवस्था बनी रहे। सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आयेगा, हमसभी को मान्य हो, इसके लिए हम लोग अपने धर्मो के अनुसार पूजा करेंगे।
बनेंगे सारे बिगड़े काम
राम जन्मभूमि के पुजारी सतेन्द्र दास ने कहा कि हमारे शास्त्रों में ऐसी शक्ति है कि किसी भी कठिन काम को पूजा पाठ से उसे पूरा कर सकते हैं, इसलिए शनिधाम में हवन-पूजन शुरू कर दिया गया है। निश्चित ही इसका प्रभाव पड़ेगा। इस कार्यक्रम के दौरान शनि पीठाधीश्वर हरिदयाल मिश्र , मोहम्मद बबलू खान आचार्य सतेन्द्र दास सरदार जसवीर सिंह, नारायण मिश्र के साथ कई संत मौजूद रहे।