
Mulayam Singh Yadav
अयोध्या. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के खिलाफ मंगलवार को फैजाबाद के एक न्यायालय में हत्या व षड्यंंत्र करने का परिवाद दायर किया गया है। घटना दो नवंबर 1990 को अयोध्या में कार सेवकों पर की गई पुलिस द्वारा फायरिंग की बताई जा रही है। प्रथम अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवींद्र दुबे ने परिवाद पर सुनवाई कर आदेश सुरक्षित रख लिया है।
मुलायम ने गोली चलवाने की बात कबूली
जानकारी के मुताबिक दो नवंबर 1990 को अयोध्या में कार सेवकों पर पुलिस द्वारा चलाई गई गोली में मृत रमेश कुमार पांडे की विधवा गायत्री देवी के वकील विशाल श्रीवास्तव ने परिवाद के साथ पिछले 27 नवंबर को प्रकाशित समाचार की प्रति भी कोर्ट में संलग्न की है। इसमें बताया गया है कि सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने अपने 79वें जन्म दिन पर राजधानी लखनऊ में आयोजित समारोह में सार्वजनिक रूप से कहा था कि इस विधानसभा चुनाव में जितनी सीटें सपा को मिली, इतनी कम सीटें तो अयोध्या में गोली चलवाने के बाद भी नहीं मिली थीं।
... इसलिए दायर किया परिवाद
परिवादी का कहना है कि दो नवंबर 1990 को दोपहर करीब 12 बजे राम जन्मभूमि आंदोलन में लालकोठी के पास पुलिस गोलीबारी में उसके पति रमेश कुमार पांडे की मौत हो गई थी। उस समय से अब तक यह नहीं पता चला था कि यह गोली किसने चलवाई थी। मुलायम सिंह यादव का बयान आने के बाद अब इसकी जानकारी हुई है। इसके लिए मुलायम सिंह यादव को तलब कर दंडित किया जाना चाहिए।
मुलायम सिंह यादव ने जताया था अफसोस
समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाए जाने की घटना पर 25 साल बाद अफसोस जताया था। उन्होंने पिछले माह कर्पूरी ठाकुर की पुण्यतिथि पर राजधानी लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि कारसेवकों पर गोली चलाना समय की मांग थी, लेकिन मुझे इस घटना पर अफसोस भी है। मालूम हो कि कारसेवकों पर गोली चलाए जाने की घटना 1990 में हुई थीं और उस वक्त मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। मुलायम ने कहा था कि 1991 में अयोध्या में गोली चलने के कारण मैंने नैतिकता के नाते मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा भी दे दिया था।
Published on:
28 Nov 2017 10:11 pm
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