
Ayodhya Ram Mandir Donation Theft: राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे की राशि चोरी के मामले में ऑल इंडिया इंडियन बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIIBOA) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामनाथ शुक्ल ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि बैंकिंग नियमों का पालन किया जाता तो यह बड़ा कांड कभी नहीं होता। इसके साथ ही रामनाथ शुक्ल ने कई बड़े दावे किए हैं।
रामनाथ शुक्ल ने स्पष्ट कहा- निश्चित तौर पर अगर सभी नियमों का पालन किया गया होता तो यह दुर्घटना होती ही नहीं। जो तय किया गया था, उसका उल्लंघन किया हुआ है। कुछ लालची तत्व बीच में आ गए, जिन्होंने इसमें अवसर ढूंढा। जब सभी को लाभ मिलने लगा तो इसमें और लोग भी शामिल हो गए। AIIBOA अध्यक्ष रामनाथ शुक्ल ने आर्थिक लेन-देन की प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं पर भी सवाल उठाए। AIIBOA अध्यक्ष ने कहा कि प्रक्रिया की अनदेखी ने इस घोटाले को बढ़ावा दिया।
रामनाथ शुक्ल ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में संलिप्त हाउसकीपिंग कर्मचारियों की भूमिका पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा- वो बिल्कुल गलत है। हाउसकीपिंग के लोग थे और उनसे हाउसकीपिंग का काम ही कराया जा सकता था। वो अपने बैंक के लिए काम कर रहे थे। आप सर्विस एजेंट या आउटसोर्स्ड कर्मचारियों को बैंक का कर्मचारी नहीं मान सकते हैं। रामनाथ शुक्ल ने जोर देकर कहा कि ऐसी व्यवस्था केवल नियमित बैंक कर्मचारियों के लिए होती है। आउटसोर्स्ड स्टाफ को बैंक की जिम्मेदारियां नहीं सौंपी जा सकतीं।
AIIBOA अध्यक्ष ने जांच की बात स्वीकार करते हुए कहा कि अभी तक जो जानकारी सामने आई है, उसमें अनिल मिश्रा, गोपाल राव, टिन्नू यादव और कुछ बैंक अधिकारियों की स्पष्ट संलिप्तता नजर आती है। उन्होंने खुद को रामभक्त बताते हुए कहा- मैं राम शिलाओं के पूजन से लेकर मंदिर निर्माण तक हर अवसर पर रहा हूं। साल 1992 के विध्वंस के समय गोंडा में था, जहां कारसेवक आ रहे थे।
हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि अंतिम फैसला जांच एजेंसियां ही करेंगी। रामनाथ शुक्ल ने आगे कहा कि अभी तक जो प्रकरण समझ में आया है। उसमें मैं कोई अंतिम निर्णय नहीं दे सकता, क्योंकि मैं जांच एजेंसी नहीं हूं। लेकिन जितना मैं आर्थिक क्षेत्र के दृष्टिकोण से समझ पा रहा हूं। इसमें निश्चित तौर पर अनिल मिश्रा, गोपाल राव, टिन्नू यादव और बैंक के लोगों की स्पष्ट संलिप्तता है।