
Ayodhya Ram Mandir SIT Investigation: अयोध्या राम मंदिर में दान, चढ़ावे और जमीन खरीद-फरोख्त में गड़बड़ी का मामला अब दिल्ली तक पहुंच गया है। इस पूरे विवाद में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से जब मंदिर के पैसों और जमीन के लेन-देन का पूरा हिसाब मांगा, तो राम मंदिर ट्रस्ट ने जानकारी देने से साफ मना कर दिया। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि इस मामले की जांच अभी SIT कर रही है, इसलिए वो अभी कोई रिपोर्ट नहीं दे सकते।
इस पूरे मामले की शुरुआत बीजेपी के स्थानीय नेता डॉ. रजनीश सिंह की एक शिकायत से हुई। उन्होंने आरोप लगाया था कि राम मंदिर के चंदे और जमीन की खरीद-फरोख्त में गड़बड़ी हुई है। रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दो बार चिट्ठी लिखकर मांग की थी कि ट्रस्ट को शुरुआत से लेकर अब तक के अपने सभी खर्चों, बैंक खातों और संपत्तियों का पूरा हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए। PMO ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले को अयोध्या जिला प्रशासन के पास भेजा और रिपोर्ट मांगी।
पीएमओ का आदेश मिलने के बाद अयोध्या के जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की। सूत्रों के मुताबिक, अयोध्या के एडीएम ने इस बारे में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से संपर्क किया था। जब एडीएम ने PMO की चिट्ठी का हवाला देकर चंदे, खर्च और जमीन के कागजात मांगे तो चंपत राय ने देने से इनकार कर दिया।
ट्रस्ट की ओर से जिला प्रशासन को बताया गया कि इस मामले में पहले से ही 13 जून को एक SIT का गठन किया जा चुका है। जांच टीम सभी जरूरी दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स को खंगाल रही है। जब तक यह सरकारी जांच चल रही है, तब तक पैसों या संपत्ति का कोई भी ब्योरा अलग से नहीं दिया जा सकता।
बीजेपी नेता रजनीश सिंह की शिकायत में मंदिर से जुड़े कई अहम और संवेदनशील मुद्दों पर जवाब मांगा गया था। PMO को भेजे गए पत्र में मांग की गई थी कि 'समर्पण निधि' अभियान के जरिए देशभर से इकट्ठा किए गए कुल फंड और अलग-अलग माध्यमों से मिले दान की पूरी जानकारी देश के सामने रखी जाए। इसके साथ ही भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने, चांदी और कीमती आभूषणों का विवरण, ट्रस्ट के सभी बैंक खातों का लेन-देन, अब तक खरीदी और बेची गई जमीनों के सौदे, मंदिर निर्माण व प्रशासन पर हुआ कुल खर्च और ऑडिट व निरीक्षण रिपोर्ट को भी सार्वजनिक करने की मांग उठाई गई थी।