अयोध्या

आजम खान पर ED की कार्रवाई को लेकर अवधेश प्रसाद का BJP पर हमला, बोले- जानबूझकर आरोप लगाकर परेशान कर रही सरकार

Awadhesh Prasad: आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ ED ने 426.46 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है। एजेंसी ने किसानों की जमीन पर कब्जे और सरकारी धन के इस्तेमाल के आरोप लगाए हैं। सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कार्रवाई को लेकर BJP सरकार पर निशाना साधा है।
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Updated: 29 Oct 2026, 11:01 AM IST
Awdhesh Prasad
सपा सांसद अवधेश प्रसाद (PC: IANS)

Azam Khan ED Action: सपा नेता आजम खान के खिलाफ ED की कार्रवाई पर समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि BJP सरकार आजम खान को परेशान करने के इरादे से उन पर लगातार तरह-तरह के आरोप लगा रही है। यह BJP की सोच को दिखाता है। आजम खान समाजवादी पार्टी के एक अच्छे और सीनियर नेता हैं, और पार्टी उनके साथ खड़ी है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अटैच किया है। एजेंसी ने इन संपत्तियों का मूल्य 426.46 करोड़ रुपये बताया है, जबकि इनकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये आंकी गई है। ED की जांच में जमीन कब्जाने और सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़े आरोप सामने आए हैं।

जौहर यूनिवर्सिटी की संपत्तियों पर ED की कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़ी मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी ने यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अटैच किया है। ED के मुताबिक, इन संपत्तियों का मूल्य 426.46 करोड़ रुपये है, जबकि बाजार में इनकी अनुमानित कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये हो सकती है। मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जांच के दौरान एजेंसी को आरोप मिले कि रामपुर के कई ठेकेदारों ने सरकारी कामों के लिए मिले पैसे और निर्माण सामग्री का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी बनाने में किया।

किसानों की जमीन और दुश्मन संपत्ति पर कब्जे का आरोप

ED की जांच रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 एफआईआर पर आधारित है। इन मामलों में आरोप है कि किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा करके उसे यूनिवर्सिटी के लिए इस्तेमाल किया गया। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, सिंहानखेड़ा गांव में दुश्मन संपत्ति के 45 प्लॉट, यानी करीब 34 एकड़ जमीन पर भी अवैध कब्जे का आरोप है। बाद में गृह मंत्रालय के अधीन दुश्मन संपत्ति के संरक्षक ने जिला प्रशासन के जरिए इस जमीन का कब्जा वापस लिया।

सरकारी काम के पैसे यूनिवर्सिटी में लगाने का आरोप

जांच एजेंसी का आरोप है कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों के लिए मिले पैसों का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी में किया गया। सरकारी काम निजी परिसर में कराए गए और ठेकेदारों से मिली रकम को ट्रस्ट में दान के रूप में वापस भेजा गया। एक कंपनी को लोक निर्माण विभाग (PWD) से करीब 186 करोड़ रुपये के ठेके मिले थे। कंपनी के प्रबंध निदेशक ने कथित तौर पर बताया कि ठेकों की 30 से 40 प्रतिशत रकम यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए सामग्री खरीदने में इस्तेमाल हुई।

इसके अलावा, यूनिवर्सिटी के निजी परिसर में विधायक और एमएलसी स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से 6.60 करोड़ रुपये के काम उत्तर प्रदेश जल निगम के जरिए कराए गए। उस समय आजम खान जल निगम के अध्यक्ष थे। आयकर विभाग ने ट्रस्ट का पंजीकरण भी रद्द कर दिया है।

सरकारी अनुदान और पंडाल के मालिकाना हक पर सवाल

उत्तर प्रदेश सरकार ने यूनिवर्सिटी परिसर में पंडाल, ओबीसी छात्रों के छात्रावास और अस्पताल ब्लॉक के लिए कुल 23.41 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। वर्ष 2015 में पंडाल के निर्माण के लिए 12.16 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे। आदेश में शर्त थी कि पंडाल का मालिकाना हक संस्कृति विभाग के पास रहेगा और सरकार इसका इस्तेमाल बिना शुल्क कर सकेगी। लेकिन 2016 में इन शर्तों में बदलाव कर दिया गया और मालिकाना हक यूनिवर्सिटी को दे दिया गया। उस समय आजम खान प्रदेश के शहरी विकास मंत्री थे।

निर्माण लागत और ट्रस्ट के खर्च में अंतर

जिला मूल्यांकन अधिकारी की 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी परिसर की 59 इमारतों के निर्माण पर 494.46 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन किया गया। जमीन की कीमत 4.63 करोड़ रुपये जोड़ी गई, जिससे कुल मूल्य 499.09 करोड़ रुपये हुआ। वहीं, ट्रस्ट ने आयकर रिटर्न में 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च दिखाया था। जांच में 12.29 करोड़ रुपये के दान को गैर-वास्तविक पाया गया। ED के अनुसार, वैध स्रोतों से 72.63 करोड़ रुपये के खर्च का ही हिसाब मिल सका। बाकी 426.46 करोड़ रुपये को एजेंसी ने अपराध से अर्जित आय माना है।

Updated on:
29 Oct 2026, 11:01 AM IST
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