
Ram Mandir Donation Controversy: राम मंदिर से जुड़े दान और आभूषणों में कथित हेराफेरी का मुद्दा एक बार फिर उत्तर प्रदेश की सियासत में गरमा गया है। समाजवादी पार्टी लगातार इस मामले को संसद में उठाने की मांग कर रही है। मानसून सत्र के दौरान अब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार से इस मुद्दे पर सदन में चर्चा कराने की मांग की है। अखिलेश यादव का कहना है कि जिस तरह छात्रों, युवाओं, NEET और पेपर लीक जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, उसी तरह लोगों की आस्था से जुड़े सवालों पर भी संसद में चर्चा होनी चाहिए।
राम मंदिर दान मामले को लेकर सपा सांसद पहले भी संसद परिसर के बाहर विरोध दर्ज करा चुके हैं। हाल में पूर्णिया सांसद पप्पू यादव के नेतृत्व में सपा सांसदों का एक समूह इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन के दौरान नाटकीय अंदाज में विरोध करता नजर आया था।अब अखिलेश यादव और फैजाबाद-अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने भी इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान अखिलेश यादव के हाथ में ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ लिखा पोस्टर दिखाई दिया।
अखिलेश यादव ने कहा कि मानसून सत्र के अब सिर्फ दो दिन बाकी हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े सवाल, NEET और परीक्षा पेपर लीक जैसे मुद्दे जितने महत्वपूर्ण हैं, उतना ही लोगों की आस्था से जुड़ा मामला भी अहम है। उनका कहना था कि सरकार को दोनों विषयों पर संसद में चर्चा करानी चाहिए और विपक्ष इसके लिए तैयार है।
राम मंदिर मामले में सरकार की ओर से स्पष्टीकरण दिए जाने के सवाल पर अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पुराने बयान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री कह चुके हैं कि मामले में ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ होगा, SIT गठित हो चुकी है और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई है, तो फिर सरकार इस मुद्दे पर संसद में सफाई देने से क्यों बच रही है? अखिलेश ने सवाल उठाया कि अगर जांच चल रही है तो सरकार को सदन में इस मामले पर चर्चा करने में क्या परेशानी है।
अखिलेश यादव ने इस दौरान सरकार पर तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ करने की बात बाद में हो, पहले जो सोना और चांदी है, उसे वापस किया जाए। उन्होंने कहा कि ‘चांदी का चांदी और सोने का सोना वापस करो।’ साथ ही उन्होंने दोहराया कि सपा संसद में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग करती रहेगी।
दरअसल, राम मंदिर को मिले दान में सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य सामान की कथित हेराफेरी को लेकर आरोप लगाए गए हैं। इसी मामले को लेकर विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है और संसद में चर्चा की मांग कर रहा है। वहीं, इस पूरे प्रकरण की जांच SIT के स्तर पर चल रही है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले सामने आए आरोपों को अंतिम तथ्य के तौर पर नहीं माना जा सकता।राम मंदिर से जुड़ा मामला धार्मिक आस्था से जुड़ा होने के कारण राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील है। यही वजह है कि संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिनों में अखिलेश यादव के इस बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर यूपी की राजनीति के केंद्र में आ गया है।