
Ram Mandir Sawan Jhulanotsav: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले के बाद अब व्यवस्थाएं पूरी तरह सामान्य हो चुकी हैं। इसी के साथ रामनगरी सावन के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में से एक श्रावण झूलनोत्सव की तैयारियों में जुट गई है। 30 जुलाई से शुरू होने वाले सावन माह में भगवान रामलला अपने चारों भाइयों के साथ भव्य चांदी के हिंडोले पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे।
राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य और निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने बताया कि सावन का महीना शुरू होते ही अयोध्या के प्रमुख मठों और मंदिरों में पारंपरिक झूला उत्सव की शुरुआत हो जाती है। इसी परंपरा का पालन करते हुए इस वर्ष भी श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भगवान रामलला को चांदी के झूले पर विराजमान कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि रामलला अपने चारों भाइयों के साथ श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे और मंदिर परिसर में इसके लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं।
महंत दिनेंद्र दास ने बताया कि मंदिर परिसर में हाल ही में विशेष हवन-पूजन भी कराया गया। उनका कहना है कि रामलला का दरबार ऐसी पवित्र भूमि है, जहां आने से नकारात्मकता दूर हो जाती है।
उन्होंने कहा कि रामलला की कृपा से हर प्रकार की बुराई और नकारात्मक सोच समाप्त हो जाती है। उनके अनुसार, हाल के दिनों में जो भी अफवाहें या नकारात्मक बातें सामने आई थीं, विशेष हवन-पूजन के बाद अब सब कुछ शांत और मंगलमय है।
दिनेंद्र दास ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ रहा है। मंदिर में वैष्णव संप्रदाय की परंपराओं के अनुसार नियमित पूजा-पाठ किया जा रहा है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में आयोजित पूनावती कार्यक्रम में अयोध्या के संतों और ट्रस्ट के सदस्यों की मौजूदगी में सभी धार्मिक अनुष्ठान परंपरा के अनुसार संपन्न किए गए।
अयोध्या में श्रावण झूलनोत्सव सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से शुरू होकर रक्षाबंधन (पूर्णिमा) तक मनाया जाएगा। इस दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और उनके भाइयों के विग्रहों को मंदिरों और ऐतिहासिक मणि पर्वत पर फूलों तथा चांदी-सोने से सजे झूलों पर विराजमान कराया जाएगा। श्रद्धालु पूरे उत्सव के दौरान भगवान के झूला दर्शन कर सकेंगे।
तैयारियों को लेकर दिनेंद्र दास ने बताया कि सभी कार्यक्रम अयोध्या की प्राचीन परंपराओं और उनके पूर्वजों द्वारा निर्धारित रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि रामलला को उसी स्वरूप में झूले तक ले जाया जाएगा, जिस स्वरूप में वे मंदिर में विराजमान हैं। वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
महंत दिनेंद्र दास ने बताया कि श्रावण झूलनोत्सव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। भगवान रामलला के लिए विशेष रूप से चांदी का झूला तैयार किया गया है, जिस पर उन्हें विराजमान कर श्रद्धालुओं को दर्शन कराए जाएंगे।
श्रावण झूलनोत्सव के दौरान अयोध्या के सैकड़ों मंदिरों से भगवान के विग्रहों की शोभायात्रा गाजे-बाजे के साथ ऐतिहासिक मणि पर्वत तक पहुंचेगी। वहां भगवान को पेड़ों की डालियों पर सजाए गए झूलों पर झुलाया जाएगा। वहीं श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भी विशेष रूप से सजाए गए चांदी के झूलों पर रामलला विराजमान होंगे।
श्रावण झूलनोत्सव के अवसर पर कनक भवन, दशरथ महल, हनुमत निवास और मणिराम दास छावनी सहित अयोध्या के कई प्रमुख मंदिरों में विशेष झांकियां सजाई जाएंगी। सावन के पूरे महीने रामनगरी धार्मिक आयोजनों और भक्तिमय माहौल से सराबोर रहेगी।