अयोध्या

राम मंदिर चंदा मामले में सुप्रीम कोर्ट नोटिस, सपा ने कोर्ट निगरानी में सीबीआई जांच मांगी

Ram Temple Donation Case:  राम मंदिर चंदा मामले में सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद सपा नेता पवन पांडेय ने कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग उठाई। उन्होंने मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई।
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Jul 14, 2026
राम मंदिर चंदा मामले में सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद सपा नेता पवन पांडेय ने कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग उठाई (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)
राम मंदिर चंदा मामले में सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद सपा नेता पवन पांडेय ने कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग उठाई (फोटो सोर्स : भाषा संवाद WhatsApp News Group)

Ram Temple Donation Case: राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक पवन पांडेय ने न्यायिक निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। 

उन्होंने कहा कि देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए आस्था और विश्वास के साथ दान दिया था। ऐसे में यदि चंदे के उपयोग को लेकर किसी प्रकार का विवाद या संदेह सामने आया है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है। पवन पांडेय ने इस पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे पूरे मामले की सच्चाई देश के सामने आ सकेगी।

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी होने के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। विपक्ष इस मामले को पारदर्शिता और जवाबदेही से जोड़ रहा है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और अदालत की प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए।

इसी क्रम में अयोध्या से समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल पवन पांडेय ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि जब मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच गया है तो इसकी जांच भी सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में होनी चाहिए। उनका कहना है कि इससे जांच की निष्पक्षता पर किसी प्रकार का सवाल नहीं उठेगा।

'श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है मामला'

पवन पांडेय ने कहा कि राम मंदिर केवल उत्तर प्रदेश या अयोध्या का विषय नहीं है, बल्कि यह करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। देश-विदेश से लोगों ने अपनी श्रद्धा के अनुसार मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया था। इसलिए यदि चंदे के उपयोग को लेकर कोई भी प्रश्न उठता है तो उसका स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब जनता को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। इससे यदि कोई आरोप निराधार हैं तो वह भी स्पष्ट हो जाएगा और यदि कहीं कोई अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय हो सकेगी।

सीबीआई जांच की मांग दोहराई

सपा नेता ने कहा कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में किसी भी प्रकार के राजनीतिक हस्तक्षेप से बचने के लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच कराना उचित रहेगा। उन्होंने कहा कि सीबीआई जैसी स्वतंत्र जांच एजेंसी यदि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच करेगी तो उसकी रिपोर्ट पर जनता का विश्वास अधिक होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में किसी भी पक्ष को जांच से डरने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है तो जांच से सच्चाई सामने आएगी और सभी संदेह स्वतः समाप्त हो जाएंगे।

राजनीतिक बयानबाजी भी हुई तेज

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद राजनीतिक गलियारों में भी बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दल पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, जबकि भाजपा और उसके सहयोगी दल लगातार यह कह रहे हैं कि राम मंदिर निर्माण पूरी तरह श्रद्धा और कानून के दायरे में किया जा रहा है तथा किसी भी प्रकार के आरोपों का उचित जवाब कानूनी प्रक्रिया के तहत दिया जाएगा। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक अरविन्द कांत त्रिपाठी  का मानना है कि राम मंदिर देश की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक परियोजनाओं में से एक है। ऐसे में इससे जुड़ा कोई भी मामला स्वाभाविक रूप से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन जाता है।

न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी सबकी नजर

अब इस पूरे मामले में सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई हैं। अदालत में प्रस्तुत होने वाले पक्षों के जवाब और आगे दिए जाने वाले निर्देशों के आधार पर मामले की दिशा तय होगी। यदि न्यायालय किसी प्रकार की जांच का आदेश देता है तो उसके बाद आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी। कानूनी विशेषज्ञ अनुराग सिंह  का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित मामलों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार ही होगा और सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।

पारदर्शिता की मांग पर जोर

पवन पांडेय ने अपने बयान में कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण होती है। उनका कहना था कि जांच होने से किसी संस्था या व्यक्ति की छवि खराब करने का उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि सच्चाई सामने लाना ही प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में भी धार्मिक और सामाजिक परियोजनाओं के प्रति लोगों का भरोसा और मजबूत होगा।

आगे की सुनवाई पर रहेगा सबका ध्यान

राम मंदिर चंदा मामले में सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब इस प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है। राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और आने वाले दिनों में अदालत की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें रहेंगी। फिलहाल सपा नेता पवन पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग कर इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। वहीं अंतिम निर्णय न्यायालय की सुनवाई और उसके आदेशों के बाद ही स्पष्ट होगा।

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