अयोध्या

Holi Celebration: सूतक काल के बावजूद अयोध्या, लखनऊ और हरदोई के सर्राफा बाजारों में परंपरा संग रंगों की शानदार होली

Tradition Wins Over Rituals: सूतक काल के बावजूद अयोध्या, लखनऊ और हरदोई के सर्राफा बाजारों में परंपरा, सामाजिक सौहार्द और उत्साह के साथ होली खेली गई, जहां रंगों संग भाईचारे का संदेश दिया गया।

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Mar 03, 2026
सूतक काल में भी नहीं टूटी परंपरा, सर्राफा बाजारों में उमंग से खेली गई होली (फोटो सोर्स : व्यापारी WhatsApp News Group)

Holi Celebration Sutak Kaal: रामनगरी अयोध्या में होली से एक दिन पहले सूतक काल होने के बावजूद सदियों पुरानी परंपरा और सांस्कृतिक उत्साह का अनोखा संगम देखने को मिला। धार्मिक मर्यादाओं के बीच सामाजिक सौहार्द, परंपरा और उत्सवधर्मिता का ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने एक बार फिर अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत कर दिया।
चौक क्षेत्र के सर्राफा व्यवसायियों ने अपने परिवारों, बच्चों और स्थानीय नागरिकों के साथ मिलकर लगभग सौ वर्षों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करते हुए उत्साहपूर्वक रंगोत्सव मनाया। रंग, गुलाल और खुशियों की बौछार के बीच पूरा क्षेत्र होली के उल्लास से सराबोर नजर आया।

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 परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम

अयोध्या में होली का उत्सव केवल रंग खेलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यहां की सामाजिक और धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। सूतक काल के कारण जहां कई धार्मिक आयोजन सीमित रहते हैं, वहीं सर्राफा बाजार में वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार होली खेलने का आयोजन जारी रखा गया। व्यापारियों का कहना है कि यह परंपरा उनके पूर्वजों द्वारा शुरू की गई थी और हर पीढ़ी इसे आगे बढ़ाती आई है। यही कारण है कि धार्मिक मर्यादाओं का सम्मान करते हुए भी सामाजिक उत्सव को जीवित रखा गया। सर्राफा बाजार में सुबह से ही दुकानदारों और उनके बच्चों ने एकत्र होकर रंग और गुलाल के साथ होली खेलनी शुरू कर दी। राहगीरों पर गुलाल उड़ाकर उन्हें भी उत्सव में शामिल किया गया।

“जय श्री राम” के जयघोष से गूंजा चौक क्षेत्र

रंगोत्सव के दौरान पूरा चौक क्षेत्र “जय श्री राम” के जयघोष से गूंज उठा। भक्ति और उत्साह का अनोखा माहौल देखने को मिला। ढोल, मंजीरे और पारंपरिक गीतों के बीच लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर शुभकामनाएं देते नजर आए। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह आयोजन केवल उत्सव नहीं बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक है। यहां व्यापारी, ग्राहक, बच्चे और बुजुर्ग सभी बिना किसी भेदभाव के एक साथ त्योहार मनाते हैं।

 साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल

इस आयोजन की सबसे खास बात रही सामाजिक संवेदनशीलता और साम्प्रदायिक सौहार्द का विशेष ध्यान। चौक क्षेत्र स्थित शिया मस्जिद को एहतियातन कपड़े से ढक दिया गया, ताकि उस पर रंग या गुलाल न पड़े। स्थानीय व्यापार मंडल और नागरिकों ने मिलकर यह व्यवस्था सुनिश्चित की, जिससे किसी भी धार्मिक स्थल की गरिमा प्रभावित न हो। यह दृश्य दर्शाता है कि अयोध्या में त्योहार केवल उत्सव नहीं बल्कि आपसी सम्मान और भाईचारे का संदेश भी देते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से यहां त्योहार इसी समझदारी और संवेदनशीलता के साथ मनाए जाते हैं, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश जाता है।

प्रशासन की मुस्तैदी, शांतिपूर्ण आयोजन

त्योहार को देखते हुए प्रशासन की ओर से भी व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुलिस और स्थानीय प्रशासन लगातार क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए थे। सीसीटीवी निगरानी, पुलिस गश्त और स्वयंसेवी समितियों की सक्रिय भागीदारी से आयोजन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित माहौल में संपन्न हुआ। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि लोगों के सहयोग के कारण कहीं भी किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं हुई।

सर्राफा बाजार की ऐतिहासिक परंपरा

अयोध्या का सर्राफा बाजार केवल व्यापारिक केंद्र नहीं बल्कि सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक माना जाता है। यहां के व्यापारी दशकों से त्योहारों को सामूहिक रूप से मनाते आए हैं। वरिष्ठ व्यापारियों के अनुसार लगभग सौ साल पहले बाजार के बुजुर्ग व्यापारियों ने यह परंपरा शुरू की थी, जिसका उद्देश्य व्यापारिक प्रतिस्पर्धा से ऊपर उठकर सामाजिक संबंधों को मजबूत करना था। आज भी नई पीढ़ी उसी उत्साह के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है।

लखनऊ और हरदोई में भी दिखा उत्साह

अयोध्या के साथ-साथ लखनऊ और हरदोई के सर्राफा बाजारों में भी होली का उत्सव खास अंदाज में मनाया गया। व्यापारियों ने बाजार बंद करने से पहले एक-दूसरे को गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दीं। लखनऊ के पुराने बाजार क्षेत्रों में व्यापारियों और ग्राहकों ने मिलकर रंगोत्सव मनाया, वहीं हरदोई में भी बाजारों में ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक होली खेली गई। इन आयोजनों में विशेष रूप से सामाजिक सौहार्द और अनुशासन का ध्यान रखा गया।

बच्चों की भागीदारी ने बढ़ाया उत्साह

होली के इस उत्सव में बच्चों की भागीदारी ने आयोजन की रौनक कई गुना बढ़ा दी। छोटे-छोटे बच्चे रंगों से सराबोर होकर खुशी से झूमते नजर आए। व्यापारियों ने बताया कि बच्चों को परंपरा से जोड़ना ही इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है, ताकि आने वाली पीढ़ियां सांस्कृतिक मूल्यों को समझ सकें।

उत्सव के साथ जिम्मेदारी का संदेश

इस आयोजन ने यह भी संदेश दिया कि त्योहार मनाते समय सामाजिक जिम्मेदारी और धार्मिक सम्मान का संतुलन बनाए रखना कितना आवश्यक है। जहां एक ओर रंग और उल्लास था, वहीं दूसरी ओर संयम और संवेदनशीलता भी साफ दिखाई दी। लोगों ने नशामुक्त और शांतिपूर्ण होली मनाने की अपील भी की।

 राम नगरी की पहचान: परंपरा, श्रद्धा और समरसता

अयोध्या सदियों से धार्मिक आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता की भूमि रही है। यहां त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम बनते हैं। सूतक काल के बावजूद परंपरा का निर्वहन और साथ ही धार्मिक स्थलों के सम्मान का ध्यान रखना इस बात का प्रमाण है कि अयोध्या की संस्कृति संतुलन और सह अस्तित्व पर आधारित है।

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