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लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे को मिली रफ्तार: 2864 करोड़ की परियोजना बदलेगी यूपी की कनेक्टिविटी

Lucknow Link Expressway: उत्तर प्रदेश में लखनऊ लिंक एक्सप्रेस वे परियोजना को गति मिली है। 50.94 किमी लंबे इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे से पश्चिम यूपी और पूर्वांचल के बीच यात्रा तेज, सुगम और ट्रैफिक मुक्त होगी।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Mar 03, 2026

(फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

(फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Lucknow Link Expressway Project: उत्तर प्रदेश में सड़क अवसंरचना को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने 50.94 किलोमीटर लंबे लखनऊ लिंक एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। यह महत्वाकांक्षी परियोजना पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल के बीच यात्रा को तेज, सुरक्षित और बाधारहित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। करीब 2,864.82 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे भविष्य में 8-लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। परियोजना को 36 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

दो बड़े एक्सप्रेसवे को जोड़ेगा नया कॉरिडोर

लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे प्रदेश के दो महत्वपूर्ण हाई-स्पीड कॉरिडोर- आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को सीधे आपस में जोड़ेगा। यह एक्सप्रेस वे आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे के 294 किलोमीटर माइलस्टोन (जलियामऊ के पास) से शुरू होकर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के 6 किलोमीटर प्वाइंट (रतिया मऊ के पास) तक पहुंचेगा। इस कनेक्टिविटी से वाहनों को राजधानी लखनऊ शहर के भीतर प्रवेश करने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

लखनऊ शहर को मिलेगा ट्रैफिक से राहत

वर्तमान में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्वांचल जाने वाले वाहनों को लखनऊ शहर के आसपास भारी ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है। नए लिंक एक्सप्रेस वे के शुरू होने के बाद लंबी दूरी के वाहन सीधे हाई-स्पीड कॉरिडोर से गुजर सकेंगे। इससे शहर के अंदर ट्रैफिक दबाव कम होगा, प्रदूषण में कमी आएगी और स्थानीय नागरिकों को भी राहत मिलेगी। खासकर मालवाहक ट्रकों और लॉजिस्टिक्स वाहनों के लिए यह मार्ग अत्यंत उपयोगी साबित होगा।

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे की खासियत

लखनऊ लिंक एक्सप्रेस वे को ग्रीनफील्ड परियोजना के रूप में विकसित किया जाएगा, यानी इसका निर्माण पूरी तरह नई भूमि पर आधुनिक मानकों के अनुसार होगा।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएं

  • 6 लेन चौड़ा एक्सप्रेस वे (भविष्य में 8 लेन विस्तार योग्य)
  • आधुनिक इंटरचेंज और सर्विस रोड
  • हाई-स्पीड यात्रा के लिए नियंत्रित प्रवेश प्रणाली
  • उन्नत सुरक्षा मानक और स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन
  • पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए डिजाइन
  • ग्रीनफील्ड मॉडल होने के कारण यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और दुर्घटनाओं की संभावना भी घटेगी।

आर्थिक विकास को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन

विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक्सप्रेस वे केवल सड़क परियोजना नहीं बल्कि आर्थिक विकास का नया इंजन साबित होगा। एक्सप्रेस वे के आसपास औद्योगिक कॉरिडोर, वेयरहाउसिंग हब, लॉजिस्टिक्स पार्क और नए निवेश क्षेत्र विकसित होने की संभावना है। प्रदेश सरकार एक्सप्रेस वे आधारित औद्योगिक विकास मॉडल पर काम कर रही है, जिसके तहत तेज परिवहन सुविधा निवेशकों को आकर्षित करती है। बेहतर कनेक्टिविटी से कृषि उत्पाद, औद्योगिक सामान और निर्यात सामग्री तेजी से बाजार तक पहुंच सकेगी।

पश्चिम से पूर्वांचल तक सफर होगा आसान

लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे के बनने से आगरा, कानपुर, इटावा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों से आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर, बलिया और पूर्वांचल के क्षेत्रों तक यात्रा पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगी।जहां अभी लंबी दूरी तय करने में अतिरिक्त समय लगता है, वहीं नए कॉरिडोर के बाद यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। इससे व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूती मिलेगी।

निर्माण कार्य के लिए तय हुआ समय लक्ष्य

UPEIDA द्वारा जारी टेंडर के अनुसार परियोजना को तीन वर्षों यानी 36 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा, जिसमें भूमि अधिग्रहण, संरचनात्मक निर्माण और सड़क विकास शामिल होंगे। सरकार परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग करेगी ताकि समय सीमा के भीतर कार्य पूरा हो सके।

रोजगार और स्थानीय विकास को बढ़ावा

एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। निर्माण कार्य में इंजीनियर, तकनीकी विशेषज्ञ, मशीन ऑपरेटर और श्रमिकों की बड़ी संख्या शामिल होगी। इसके अतिरिक्त, परियोजना के आसपास होटल, ढाबे, पेट्रोल पंप, मरम्मत केंद्र और सेवा सुविधाओं के विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

एक्सप्रेस वे नेटवर्क में मजबूत कड़ी

उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बनता जा रहा है जहां एक्सप्रेसवे नेटवर्क तेजी से विस्तार पा रहा है। पहले से संचालित आगरा–लखनऊ और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के बीच यह नया लिंक राज्य के हाई-स्पीड रोड नेटवर्क को और सशक्त करेगा। भविष्य में यह कॉरिडोर पूर्वांचल से दिल्ली और पश्चिमी भारत की दूरी को भी कम करने में मदद करेगा।

स्मार्ट मोबिलिटी की दिशा में बड़ा कदम

राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को बेहतर कनेक्टिविटी और स्मार्ट मोबिलिटी वाला राज्य बनाना है। हाई-स्पीड एक्सप्रेस वे नेटवर्क से न केवल यात्रा आसान होगी बल्कि निवेश, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे इसी विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

पर्यावरण और सुरक्षा पर विशेष ध्यान

परियोजना के निर्माण में पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जाएगा। सड़क किनारे हरित पट्टी विकसित की जाएगी और वर्षा जल संरक्षण जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल होंगी। साथ ही, आधुनिक निगरानी प्रणाली, इमरजेंसी हेल्पलाइन, एम्बुलेंस सुविधा और सुरक्षा उपकरणों को भी शामिल किया जाएगा ताकि यात्रियों को सुरक्षित यात्रा अनुभव मिल सके।

विकास धुरी बनेगा लिंक एक्सप्रेसवे

विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेस वे नेटवर्क बढ़ रहा है, राज्य राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स मानचित्र पर मजबूत स्थिति हासिल कर रहा है। लखनऊ लिंक एक्सप्रेस वे पश्चिम और पूर्व के बीच विकास की नई धुरी बनेगा। यह परियोजना केवल दूरी कम करने का माध्यम नहीं बल्कि क्षेत्रीय संतुलित विकास, औद्योगिक विस्तार और आर्थिक प्रगति का आधार बनेगी।