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Eid al-Fitr: ईद की खुशियों के बीच ग़म का इज़हार, काली पट्टी बांधकर नमाज़ पढ़ने की अपील से चर्चा तेज

Black Bands On Eid:  ईरान पर हुए हमले और आयतुल्लाह खामेनई की शहादत को लेकर लखनऊ में शांति और एकजुटता का संदेश देते हुए ईद-उल-फितर पर काली पट्टी बांधकर नमाज अदा करने की अपील की गई।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Mar 03, 2026

ईद के दिन काली पट्टी बांध नमाज़ की अपील, ईरान घटना पर लखनऊ से उठा बड़ा संदेश (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

ईद के दिन काली पट्टी बांध नमाज़ की अपील, ईरान घटना पर लखनऊ से उठा बड़ा संदेश (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

Eid al-Fitr black band demonstration: अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के बीच राजधानी लखनऊ में धार्मिक और सामाजिक स्तर पर संवेदनशील प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। ईरान पर हुए हमले और आयतुल्लाह अली खामेनेई की शहादत को लेकर शिया समुदाय में गहरा शोक व्यक्त किया जा रहा है। इसी क्रम में शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नक़वी ने ईद-उल-फितर के अवसर पर शांतिपूर्ण विरोध और एकजुटता का संदेश देते हुए महत्वपूर्ण अपील जारी की है। मौलाना ने शहर के मोमिनीन से ईद की नमाज़ काली पट्टी बांधकर अदा करने का आह्वान किया है, ताकि ईरान के प्रति संवेदना और वैश्विक मुस्लिम एकता का संदेश दिया जा सके।

तीन दिन का शोक, वैश्विक दुख में शामिल लखनऊ

मौलाना सैफ अब्बास नक़वी ने अपने बयान में बताया कि लखनऊ के उलेमा-ए-किराम द्वारा आयतुल्लाह खामेनई की शहादत पर तीन दिन के शोक की घोषणा की गई थी, जिसका तीसरा दिन आज पूरा हो रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान में चालीस दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई है और इसी अवधि के बीच ईद-उल-फितर का त्योहार भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह समय केवल उत्सव का नहीं बल्कि संवेदना और आत्ममंथन का भी है।

 ईद भी, शोक भी- जिम्मेदारी निभाने की अपील

मौलाना ने कहा कि ईद मुसलमानों के लिए खुशी और शुक्राने का त्योहार है, लेकिन जब उम्मत का एक हिस्सा ग़म में हो तो पूरी दुनिया के मुसलमानों की जिम्मेदारी बनती है कि वे उस दर्द को महसूस करें। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि ईद की नमाज़ अवश्य अदा की जाए। सामाजिक सौहार्द बनाए रखा जाए। किसी प्रकार की अव्यवस्था या आक्रोश से बचा जाए। शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया जाए। काली पट्टी बांधकर नमाज़ पढ़ना इसी शोक और एकजुटता का प्रतीक होगा।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन का संदेश

मौलाना सैफ अब्बास नक़वी ने स्पष्ट किया कि यह अपील किसी भी प्रकार के तनाव या विवाद को बढ़ावा देने के लिए नहीं है, बल्कि पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का माध्यम है। उन्होंने कहा कि विरोध का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे समाज में शांति बनी रहे और दुनिया को यह संदेश जाए कि इंसाफ और मानवता के लिए आवाज उठाई जा रही है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर टिप्पणी

अपने बयान में मौलाना ने भारत की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों की प्रतिक्रिया का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों ने खुलकर ईरान पर हुए हमले की निंदा की और आयतुल्लाह ख़ामेनई का नाम लेकर ताज़ियत पेश की। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ दलों ने इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाया। कुछ ने विरोध दर्ज कराया लेकिन न तो ईरान का नाम लिया और न ही आयतुल्लाह ख़ामेनई का।

 व्यक्तिगत स्तर पर लिया फैसला

मौलाना सैफ अब्बास नक़वी ने बताया कि जिन राजनीतिक संगठनों ने स्पष्ट रूप से संवेदना व्यक्त नहीं की, उनके संबंध में उन्होंने व्यक्तिगत निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि वे ऐसे दलों द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टियों में शामिल नहीं होंगे,यदि ईद के दिन वे ईद मिलने आएंगे तो वे व्यक्तिगत रूप से मुलाकात स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह उनका निजी फैसला है और अन्य लोगों पर इसे लागू करना अनिवार्य नहीं है।

लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल

धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि लखनऊ हमेशा से अपनी गंगा-जमुनी तहज़ीब, शांति और धार्मिक सहअस्तित्व के लिए जाना जाता रहा है। यहां विरोध और संवेदना भी संयम और अनुशासन के साथ व्यक्त की जाती है। मौलाना की अपील को भी इसी परंपरा का हिस्सा माना जा रहा है, जहां धार्मिक भावनाओं के साथ सामाजिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

 प्रशासन की नजर

सूत्रों के अनुसार प्रशासन भी ईद-उल-फितर को देखते हुए सुरक्षा और कानून व्यवस्था के व्यापक इंतजाम कर रहा है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा ताकि त्योहार शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो सके। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह या भड़काऊ संदेश से दूर रहें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।