MP News: तय समय-सीमा के भीतर पट्टा वितरण पूरा होना न केवल मुश्किल, बल्कि लगभग असंभव दिखाई दे रहा है....
MP News: मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद जिस पट्टा वितरण कार्यक्रम से जिले के शहरी क्षेत्रों, नगर पालिका और नगर परिषद के गरीब व जरूरतमंद परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद थी, वही योजना अब प्रशासनिक लेटलतीफी की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। शासन द्वारा तय कार्यक्रम के अनुसार जनवरी 2026 से पट्टों के वितरण की प्रक्रिया शुरू होनी थी, लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि अब तक केवल प्राप्त आवेदनों की प्राथमिक जांच ही पूरी हो पाई है।
ऐसे हालात में तय समय-सीमा के भीतर पट्टा वितरण पूरा होना न केवल मुश्किल, बल्कि लगभग असंभव दिखाई दे रहा है। नपा बड़वानी के शहरी क्षेत्र में पट्टों के लिए 603 से अधिक लोगों ने आवेदन किए थे। ये सभी आवेदन नगर पालिका बड़वानी में विधिवत जमा हुए, जिन्हें जांच के लिए एसडीएम कार्यालय भेजा गया।
आरआई और पटवारियों के गठित दल द्वारा इन आवेदनों की जांच की गई, लेकिन जांच की निर्धारित तिथि निकलने के बावजूद प्रक्रिया अब भी अधर में लटकी हुई है। हैरानी की बात ये है कि प्रारंभिक जांच में लगभग 100 प्रतिशत आवेदन अपात्र पाए गए है। प्रशासन की ओर से अब तक जांचे गए आवेदनों में एक भी पात्र हितग्राही सामने नहीं आया।
एसडीएम बड़वानी भूपेंद्र रावत ने बताया कि अपात्र आवेदकों की सूची सार्वजनिक कर दी गई है और उसमें अपात्रता के स्पष्ट कारण भी दर्ज है। उनके अनुसार, मुख्य कारण ये हैं कि आवेदक स्वयं या उनके परिजन पहले से किसी पट्टे की योजना का लाभ ले चुके है अथवा जिस भूमि पर कब्जा बताया गया है, वह पहले से किसी सरकारी विभाग को आवंटित पाई गई है। हालांकि, इस स्थिति से आवेदकों में असमंजस और नाराजगी दोनों बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि जब पात्रता के मापदंड पहले से तय थे, तो इतनी बड़ी संख्या में आवेदन अपात्र कैसे हो गए, यह भी गंभीर जांच का विषय होना चाहिए।
पट्टा वितरण में देरी की एक बड़ी वजह तहसील कार्यालय में चल रही रिवीजन के तहत 'नो मैपिंग' मतदाताओं की सुनवाई बताई जा रही है। तहसीलदार स्वयं इन मामलों की सुनवाई कर रहे हैं, जिससे पूरा राजस्व अमला उसी कार्य में व्यस्त है। दिनभर तहसील न्यायालय में नो मैपिंग प्रकरणों की सुनवाई चलने के कारण पट्टों की जांच और वितरण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया है। पट्टा वितरण मुख्यमंत्री स्तर की घोषणा वाला कार्यक्रम है, लेकिन इसके क्रियान्वयन के लिए न तो अतिरिक्त जांच दल बनाए गए और न ही प्रभावी कार्य-विभाजन किया गया।
नगर पालिका दल प्रभारी बलदेवसिंह ठाकुर के अनुसार, शासन ने पट्टा वितरण के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की थी। 29 दिसंबर 2025 तक सर्वे, हितग्राहियों का चिन्हांकन और दस्तावेज संकलन होना था। 5 जनवरी तक पट्टा विलेखों का मुद्रण और जनवरी में वितरण शुरू कर 20 फरवरी तक इसे पूरा किया जाना था। लेकिन जनवरी के 12 दिन बीत जाने के बावजूद वितरण शुरू नहीं हो सका।
पट्टे की आस लगाए हितग्राही अब एसडीएम और तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें बार-बार बुलाया जाता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा कि उन्हें पट्टा मिलेगा या नहीं और कब मिलेगा। यदि यही स्थिति बनी रही, तो यह योजना केवल फाइलों तक सीमित रह जाएगी और मुख्यमंत्री की घोषणा आमजन के लिए एक और अधूरा वादा बनकर रह जाएगी।