खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए कृषि विभाग सभी तरह के हथकंडे और उपायों को अजमाता है। लेकिन उसके बाद भी खाद की कालाबाजारी पर विभाग पूरी तरह से अंकुश नहीं लगा पाता है।
बागपत. प्रदेश के विभिन्न जनपदों से खाद की कालाबाजारी और उसकी कमी की शिकायतों के बीच योगी सरकार ने खाद/उर्वरकों के वितरण-बिक्री के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। इसके लिए शर्तें भी तय कर दी हैं। कृषि विभाग के अपर मुख्य सचिव डा. देवेश चतुर्वेदी सभी मंडलायुक्तों और डीएम को भेजे पत्र में कहा है कि किसानों को उर्वरकों की बिक्री उनकी जोत बही या खतौनी में दर्ज कृषि भूमि और पिछली फसलों का ब्योरा देखते हुए ही दिए जाएं।
फॉस्फेटिक उर्वरकों की मांग है अधिक
उन्होंने कहा है कि रबी फसलों की बुवाई के समय फसल वेसल-ड्रेसिंग में मुख्य रूप से फॉस्फेटिक उर्वरकों (डीएपी, एनपीके एवं एसएसपी) का प्रयोग किया जाता है। ऐसे में फिलहाल फॉस्फेटिक उर्वरकों की मांग अधिक है। निर्देश दिए गए हैं कि किसानों को उनकी जोत बही के अनुसार पीओएस मशीनों के जरिए उर्वरक दिए जाएं।
अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए ब्योरा
विक्रेताओं द्वारा अपने विक्रय रजिस्टर में उर्वरक बिक्री का ब्योरा अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए जिसमें किसान के नाम के साथ उसकी खेती का रकबा और उसकी फसल का ब्योरा जरूर हो। वितरण या बिक्री केंद्रों पर कृषि, सहकारिता, ग्राम्य विकास सहित अन्य विभागों के अधिकारियों की ड्यूटी लगाए जाने को भी कहा गया है।