बहराइच

निहत्थे युवक को कई गोलियां मारीं, पैर जला कर नाखून अलग कर दिए…. बहराइच हिंसा पर फैसले में जज ने दिया मनुस्मृति का भी हवाला

बहराइच की महाराजगंज हिंसा पर सेशन कोर्ट का सख्त फैसला आया है। निहत्थे युवक की बर्बर हत्या को अदालत ने इंसानियत पर हमला बताया और दोषियों को कड़ी सजा देकर समाज को कड़ा संदेश दिया।

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Dec 13, 2025
रामगोपाल मिश्र की फाइल फोटो सोर्स पत्रिका

बहराइच में अक्टूबर 2024 में हुई हिंसा को लेकर प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश पवन कुमार शर्मा द्वितीय ने महाराजगंज हिंसा के मामले में रामगोपाल मिश्र की हत्या के दोषियों को सजा सुनाते हुए कहा कि निहत्थे युवक को गोली मारकर छलनी किया गया। उसके पैरों को इतनी बेरहमी से जलाया गया कि नाखून तक उभर आए। इस निर्मम घटना से समाज में तनाव और अस्थिरता फैल गई। हत्या के अगले ही दिन इलाके में भीषण हिंसा भड़क उठी।

बहराइच अपर सत्र न्यायाधीश की कोर्ट ने अक्टूबर 2024 में जिले में हुई सांप्रदायिक हिंसा पर कड़ा रुख अपनाया है। इस हिंसा में एक युवा की जान चली गई थी। और पूरे इलाके में तनाव फैल गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में इस हत्या को ‘अत्यधिक बर्बरता’ का उदाहरण बताया और कहा कि इस घटना ने सामाजिक व्यवस्था को हिला दिया। तथा इंसानियत के मूल्यों को तार-तार कर दिया।

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कोर्ट ने कहा निहत्थे युवक को कई गोलियां मारी गई पैर जलाए गए

अदालत ने कहा कि मृतक युवक निहत्था था। उसे कई गोलियां मारी गईं। उसके पैरों को इतनी बेरहमी से जलाया गया कि उसके पैर के नाखून तक झड़ गए। इस निर्ममता ने आम लोगों के मन में भय, अस्थिरता और गहरा आक्रोश पैदा किया। कोर्ट के मुताबिक, यह सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं था। बल्कि समाज की सामूहिक शांति और भरोसे पर सीधा प्रहार था।

इस तरह की घटनाओं से कानून व्यवस्था पर विश्वास डगमगाता

फैसले में अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इस तरह की घटनाओं से लोगों का कानून और व्यवस्था पर विश्वास डगमगाता है। न्यायालय ने समाज में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने की जरूरत पर जोर देते हुए मनुस्मृति का भी हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि जो लोग सामाजिक नियमों और मानवीय मूल्यों को रौंदते हैं। उनके लिए कठोर और निवारक सजा जरूरी है। ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

अपराध की प्रकृति इतनी वीभत्स,नरमी बरतने का कोई आधार नही

अदालत ने मामले में मौजूद परिस्थितियों का गहन विश्लेषण करते हुए कहा कि इसमें लगभग 100 प्रतिशत तक गंभीर (एग्रेवेटिंग) हालात हैं। जबकि राहत देने वाले (मिटिगेटिंग) कारण न के बराबर हैं। कोर्ट के अनुसार, अपराध की प्रकृति इतनी वीभत्स है। कि इसमें नरमी बरतने का कोई आधार नहीं बनता। इस फैसले को बहराइच हिंसा के पीड़ित परिवार और समाज के लिए न्याय की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अदालत ने साफ संदेश दिया है कि कानून हाथ में लेने और इंसानियत को कुचलने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

Updated on:
13 Dec 2025 09:40 am
Published on:
13 Dec 2025 09:07 am
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