
बालाघाट से अखिलेश ठाकुर की रिपोर्ट
Balaghat Mohanlal Maheshwari Will Dispute: मध्यप्रदेश के बालाघाट के गुजरी चौक निवासी स्व. मोहनलाल माहेश्वरी की वसीयत 30 साल बाद फिर एक बार चर्चा में है। अधिवक्ता वर्णन श्रीवास्तव ने चार ट्रस्टों की ओर से वसीयत को छुपाकर रखने का आरोप सराफा कारोबारी व स्व. माहेश्वरी के करीबी अनिल कांकरिया पर लगाया है। बुधवार को सर्किट हाउस में ट्रस्टों की ओर से आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान अधिवक्ता वर्णन श्रीवास्तव ने ये गंभीर आरोप लगाया है। अधिवक्ता का दावा है कि स्व. माहेश्वरी की वसीयत में जिन संपत्तियों का उल्लेख है उनकी कीमत करीब 60 करोड़ रुपये है।
स्व. मोहनलाल माहेश्वरी सराफा कारोबारी थे। वे मूलरूप से जोधपुर राजस्थान के निवासी थे। लंबे समय पूर्व वे बालाघाट आए और यहीं बस गए। उनका कोई संतान नहीं थी, उन्होंने अपने रिश्तेदार की एक लड़की गीता को गोद लिया और पुत्री की तरह पाला था और उसकी शादी बालाघाट में ही की। उनकी पत्नी का निधन वर्ष 1974 में हो गया था। उन्होंने अपने कारोबार से बालाघाट में कई संपत्तियां अर्जित की थी। 16 अगस्त 1996 को उन्होंने अपनी वसीयत लिखी थी और इसके बाद उनका निधन हो गया था। वे चाहते थे कि उनकी मृत्यु के बाद उनकी संपत्तियों को बेचकर अलग-अलग ट्रस्ट और रिश्तेदारों में बांटा जाए। वसीयत में इसी बात का उन्होंने उल्लेख किया है।
अधिवक्ता वर्णन श्रीवास्तव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि स्व. मोहनलाल माहेश्वरी की वसीयत का पालन उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप नहीं हो पाया। स्व. माहेश्वरी ने 16 अगस्त 1996 को वसीयत लिखी तथा उसे निष्पादित करने के लिए सूरजमल बोहरा को बंद लिफाफे में सौंपा था। उन्होंने तब कहा था कि मेरी मृत्यु के बाद लिफाफे को अनिल कांकरिया को सौंप देना। उनकी मृत्यु के बाद सूरजमल ने उक्त लिफाफा कांकरिया को सौंप दिया। अधिवक्ता का आरोप है कि उक्त वसीयत को करीब 30 वर्षों तक कांकरिया ने छुपाकर रखा। इस बीच जब उनको विधिक नोटिस जारी हुआ तो वसीयत होने की बात को उन्होंने स्वीकार किया।
अधिवक्ता वर्णन श्रीवास्तव का दावा है कि स्व. माहेश्वरी की वसीयत में उल्लेख संपत्तियों की कीमत करीब 60 करोड़ रुपए है। अधिकांश संपत्तियां राजस्थान के जोधपुर से लाए गए मृतक के दो वारिसों को आगे कर छल पूर्वक बेच दी गई हैं। अधिवक्ता का आरोप है कि वसीयत को जानबूझकर छिपाना, छलपूवर्क बेचना आपराधिक षडयंत्र है। इसको लेकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिवक्ता श्रीवास्तव राम मंदिर ट्रस्ट, अन्नपूर्णा मंदिर ट्रस्ट, अंग्रेजी स्कूल ट्रस्ट व अग्रवाल समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। सभी ट्रस्टों के पदाधिकारी भी मौके पर उपस्थित रहे।
शहर के सराफा कारोबारी अनिल कांकरिया ने बताया कि वसीयत मिलने के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया था। कोर्ट से चार ट्रस्टों के पदाधिकारियों सहित वसीयत में जिनके नाम थे कुल 11 लोगों को नोटिस जारी हुआ था। नोटिस के साथ वसीयत की कॉपी भी संलग्न थी। सभी के नोटिस रिसीव करने के साक्ष्य कोर्ट में वर्ष 1997 से उपलब्ध हैं। ऐसे में वसीयत छुपाने का आरोप लगाना निराधार और हास्यपद है। वसीयत लंबे समय तक कोर्ट में जमा रही। वहीं संपत्तियां अवैध तरीके से बेचने के आरोप पर उन्होंने कहा कि इसके लिए मैंने बहुत लड़ाई लड़ी पर मुझे सहयोग नहीं मिला। उन्होंने कहा कि जो लोग मुझ पर लगा रहे हैं वह दबाव बनाकर ब्लैकमेल करना चाहते हैं। मैं उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करुंगा।
गुजरी चौक निवासी स्व. मोहनलाल माहेश्वरी ने वसीयत में क्या कुछ लिखा है वो आपको बताते हैं-
इसके अलावा उन्होंने अपनी सम्पत्ति को बेचने के बाद मिलने वाले पैसे को अपने रिश्तेदारों के नाम के साथ अलग-अलग उनको कितनी राशि देनी है, इसका भी उल्लेख किया था। इन सारे कार्य को करने की जिम्मेदारी उन्होंने वसीयत में अनिल कांकरिया को सौंपी थी।