
mp balaghat bear hunting: मध्य प्रदेश के बालाघाट में तांत्रिक क्रिया के लिए भालू को करंट देकर मारने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। अंधविश्वास की खौफनाक कहानी दिल दहलाने वाली है। पिपराटोला के खैरलांजी वन परिक्षेत्र के जंगलों में शिकारियों ने करंट से शिकार के लिए हाईवोल्टेज तारों का जाल बिछाया। इसकी जद में आए सुस्त भालू की मौत हो गई। इसके बाद शिकारियों ने उसका लीवर और पंजे निकाल लिए गए और उसके शव के टुकड़े-टुकड़े कर दिए।
वन विभाग को संदेह है कि भालू के साथ की गई दरिंदगी का कारण अंधविश्वास हो सकता है। वन विभाग ने इंसानियत को शर्मसार करने वाले इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, वहीं दो अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।
मामले में वन विभाग (mp balaghat bear hunting forest department action) का कहना है कि शिकारियों ने जंगली सुअरों के मांस के लिए जंगल में हाईवोल्टेज बिजली के तारों का जाल बिछाया था। लेकिन इस जाल में एक नर भालू फंस गया और करंट से उसकी मौत हो गई। भालू को मृत देखकर शिकारी अंधविश्वास की सारी हदें पार कर गए। उन्होंने धारदार हथियार से भालू के शव के टुकड़े-टुकड़े किए।
भालू का सीना चीरा और उसका लीवर निकाल लिया। उसके पैरों के पंजे काट लिए। वन विभाग ने यह भी बताया कि आरोपियों ने उसके दूसरे अवशेषों को एक कुएं में फेंक दिया ताकि सबूत मिटाए जा सकें और किसी को इस दरिंदगी की भनक तक न लग सके।
खैरलांजी रेंजर डीसी वासनिक के मुताबिक प्राथमिक जांच (mp balaghat bear hunting crucial case) में सामने आया है कि भालू का लीवर किसी तांत्रिक अनुष्ठान के लिए निकाला गया था। वहीं उसके पंजे टोने-टोटके या काले जादू के लिए इस्तेमाल करने का मामला हो सकता है। उन्होंने यह भी अंदेशा जताया कि मामला वन्यजीव तस्करी का भी हो सकता है।
वन विभाग ने इस मामले में तुरंत एक्शन लेते हुए दो आरोपियों सुरेंद्र गोंड (40) और छबीलाल उइके(38) को गिरफ्तार (mp balaghat bear hunting two arrested) किया है। जबकि दो अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। आरोपियों के पास से भालू के पंजे बरामद किए गए हैं। विभाग ने आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 1972 के तहत गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। वन विभाग अधिकारियों का कहना है कि मामले में बड़े तांत्रिक नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।