
Balaghat Newborn Death Case: मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के वारासिवनी थाना क्षेत्र के एक गांव में एक घर के पीछे से पुलिस ने गोबर के गड्ढे से नवजात का शव निकाला। नवजात के मुंह व गले पर कपड़ा बंधा था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है। नवजात के नाना ने जहर खाकर आत्महत्या की कोशिश की है और उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस ने बताया कि ग्रामीणों की सूचना पर एसडीओपी अभिषेक चौधरी टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे, लेकिन अंधेरा और तेज बारिश के कारण शव नहीं निकाला जा सका। इसके बाद दूसरे दिन सुबह नायब तहसीलदार चंद्रकिशोर ककोड़िया, चिकित्सक और पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और शव को गोबर के गड्ढे से बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए भेजा। नवजात की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलने की बात पुलिस कह रही है।
शुरुआती पूछताछ में गांव के लोगों ने बताया है कि बीती रात नवजात बच्चे के रोने की आवाज उन्होंने सुनी थी लेकिन जब दूसरे दिन संबंधित परिवार से पूछताछ की तो परिवार के सदस्यों ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। बात गांव में फैली तो आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता ने बताया कि एक परिवार की अविवाहित बेटी गर्भवती थी। अनुमान है कि उसने नवजात को जन्म दिया है। इसके बाद सरपंच ने पुलिस को सूचना दी।
ग्रामीणों ने बताया कि नवजात बच्चे को गोबर के गड्ढे में गाड़ने की घटना सामने आने के बाद नवजात के नाना ने जहर खा लिया। जिसके कारण उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है और वहां उसका इलाज चल रहा है। चर्चाएं हैं कि बेटी के बिन ब्याही मां बनने के बाद बदनामी के डर से नाना ने ही नवजात को गोबर के गड्ढे में जिंदा गाड़ा है। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
इस घटना के सामने आने के बाद गांव का माहौल बदल गया है। प्रथम दृष्टया सामाजिक बदनामी के भय को लेकर बनी धारणाएं और समय पर सामाजिक-प्रशासनिक हस्तक्षेप के अभाव की वजह से एक नवजात की जिंदगी खत्म हुई है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस पूरे मामले की गुत्थी को सुलझाएगी।