
Balod College: छत्तीसगढ़ राज्य बने 26 साल बीत गए। 4 मुख्यमंत्री बदल गए, लेकिन जिले में उच्च शिक्षा बदहाली का शिकार है। सरकार और प्रशासन की उपेक्षा के कारण जिले के लीड कॉलेज शासकीय घनश्याम सिंह गुप्त महाविद्यालय की हालत बदतर हो गई है। कॉलेज में न नियमित प्राचार्य है और न प्राध्यापक। पढ़ाई पूरी तरह संविदा और अतिथि व्याख्याताओं के भरोसे चल रही है। मैनपावर का भारी अभाव है। बावजूद शासन-प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।
प्राचार्य पद ढाई से 3 साल से रिक्त है। प्रभारी के भरोसे संचालन हो रहा है। प्राध्यापक के 8 पद स्वीकृत हैं, एक भी पद पर नियुक्ति नहीं हुई है। सहायक प्राध्यापकों के 41 पद में से सिर्फ 16 पर नियुक्ति है और 25 पद रिक्त हैं। अतिथि व्याख्याताओं के सभी 31 पद रिक्त है।
लीड कॉलेज में प्राध्यापकों और सहायक प्राध्यापकों की भर्ती करानी है तो भाजपा और कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों को आवाज उठानी होगी। जब तक सरकार पर जनप्रतिनिधि दबाव नहीं बनाएंगे, तब तक सरकार भी ध्यान नहीं देगी। उच्च शिक्षा की बदहाली का खामियाजा जिले के हजारों विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
अव्यवस्था के कारण इस बार यूजी की 1170 सीटों में से सिर्फ 700 सीटें ही भर पाई हैं। कई विद्यार्थी मजबूरी में दूसरे जिलों के कॉलेजों की ओर पलायन कर रहे हैं। छात्र संगठन हर साल आंदोलन करते हैं, लेकिन सरकार सिर्फ आश्वासन देकर टाल देती है। विद्यार्थियों ने कहा कि लीड कॉलेज में अव्यवस्था चरम पर है। बिना नियमित स्टाफ के उच्च शिक्षा का स्तर कैसे सुधरेगा।
यह कॉलेज जिले के 13 शासकीय और 5 निजी कॉलेज का लीड कॉलेज है। स्टाफ की कमी के कारण पढ़ाई के साथ अन्य 18 कॉलेजों का काम भी इसी कॉलेज के कर्मचारियों को करना पड़ता है। हर 6 महीने में शासन को समस्याओं की रिपोर्ट भेजी जाती है, लेकिन कार्रवाई शून्य।
रिक्त पदों की जानकारी हर साल शासन को भेजी जाती है। भर्ती शासन स्तर से ही होगी। इस बार भी जानकारी भेजी गई है।
डॉ. जेके खलको
प्रभारी प्राचार्य