
बालोद जिला मुख्यालय को जाम और भारी वाहनों से मुक्ति दिलाने वाली तरौद-दैहान बायपास परियोजना 14 साल से सरकारी फाइलों में दम तोड़ रही है। करीब 40 करोड़ रुपए की लागत वाली इस 7.80 किलोमीटर लंबी सड़क को वर्ष 2012 में शासन की मंजूरी और 2016 में प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है। बावजूद निर्माण शुरू नहीं हो सका। वन विभाग और लोक निर्माण विभाग ने अपनी-अपनी प्रक्रिया पूरी कर फाइल शासन को भेज दी है।
2012 से अब तक हर साल समीक्षा बैठक में परियोजना का जिक्र होता है, लेकिन जमीन पर काम शून्य है। नागरिकों का सवाल है कि आखिर निर्माण कब शुरू होगा। बढ़ते यातायात के कारण बालोद शहर की मुख्य सड़क पर दबाव बढ़ रहा है। दल्लीराजहरा, दुर्ग-झलमला, धमतरी, राजनांदगांव और डौंडीलोहारा जाने वाले ट्रक, हाईवा और मेटाडोर शहर के बीच से गुजरते हैं। बस स्टैंड, पेट्रोल पंप और गंजपारा-झलमला मार्ग पर कई गंभीर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारी वाहनों को शहर से बाहर निकालने पर हादसे 70 प्रतिशत तक कम हो जाएंगे।
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पीडब्ल्यूडी की डीपीआर के अनुसार बायपास सीधे नेशनल हाइवे-930 से जुड़ेगा। इसके बनने से न सिर्फ शहर को जाम से मुक्ति मिलेगी बल्कि यात्रा का समय घटेगा और व्यापार भी बढ़ेगा। जिले की सबसे पुरानी और बहुप्रतीक्षित परियोजना को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं।
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वन विभाग के डीएफओ अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि बायपास के लिए जरूरी वन भूमि की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। रिपोर्ट शासन और पीडब्ल्यूडी को भेज दी गई है। आगे का निर्णय शासन को लेना है।
पीडब्ल्यूडी ईई पूर्णिमा चंद्रा ने कहा कि विभाग से संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी कर प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। शासन से स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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Updated on:
10 Aug 2026 11:16 pm
Published on:
10 Aug 2026 11:16 pm
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