
बालोद जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान भरोसे है। हालात इतने बदतर हैं कि ग्राम पीपरछेड़ी में संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिछले 5 वर्षों से जर्जर हालत में चल रहा है। बारिश होते ही पूरे अस्पताल में पानी टपकने लगता है। दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। डॉक्टरों के क्वार्टर भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। विभाग के तरफ से कई बार प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं, लेकिन शासन नए भवन को स्वीकृति नहीं दे रहा।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराने आए त्रिवेणी साहू, गोविंदा कौशिक और पदमनी देवांगन ने कहा, यहां इलाज और प्रसव की सुविधा बहुत अच्छी है। डॉक्टर समय पर मिल जाते हैं। लेकिन अस्पताल भवन की हालत सबसे खराब है। हर कमरे में पानी टपकता है। पुराने प्रसव कक्ष और अन्य कमरों की दीवारें कभी भी गिर सकती हैं।
सूत्रों के अनुसार पीएचसी पीपरछेड़ी का पुराना भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। उसे तोडऩे के आदेश जारी हो चुके हैं, लेकिन कब तोड़ा जाएगा इसकी कोई तारीख तय नहीं है। पिछले 5 वर्षों से स्वास्थ्य विभाग हर दो महीने में नए भवन के लिए शासन को प्रस्ताव भेज रहा है। सीजीएमएससी भी हर साल जर्जर केंद्रों की रिपोर्ट मांगता है, लेकिन उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं होती। पीपरछेड़ी अकेला नहीं है। जिले के कई स्वास्थ्य केंद्र बदहाल हैं।
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पीपरछेड़ी, लिमोरा, पापरा, सोहपुर, गुरेदा, तिलोदा, अरमरीकला, हितेकसा और बालोदगहन शामिल हैं।
जिला अस्पताल - 1
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र - 6
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र - 30
उप स्वास्थ्य केंद्र - 196
अति जर्जर स्वास्थ्य केंद्र - 10
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पीपरछेड़ी पीएचसी की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि ग्रामीण क्षेत्र में यह सालभर में सबसे ज्यादा सुरक्षित प्रसव कराने वाला केंद्र है। लेकिन सुविधाओं के मामले में यही केंद्र सबसे ज्यादा उपेक्षित है। ग्रामीणों का कहना है कि शासन-प्रशासन को अब गंभीरता दिखानी चाहिए, वरना कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
सीएमएचओ डॉ. जेएल उइके ने कहा जिले के सभी जर्जर स्वास्थ्य केंद्रों के लिए नए भवन की मांग शासन से की गई है। कई उप स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण कार्य प्रगति पर है जो अगले साल तक पूरा हो जाएगा। पीपरछेड़ी पीएचसी के लिए भी प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
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Updated on:
08 Aug 2026 11:10 pm
Published on:
08 Aug 2026 11:10 pm
