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महिलाओं को लालच देकर निकाला लाखों का कर्ज, अब घर-घर पहुंच रहा नोटिस

महिलाओं के नाम पर फर्जी ऋण लेकर ठगी का मामला सामने आया है। गुरुर ब्लॉक के ग्राम नारागांव की दर्जनों महिलाओं ने अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय जांच और बैंक ऋण से मुक्ति दिलाने की मांग की।
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महिलाओं के नाम पर फर्जी ऋण लेकर ठगी का मामला सामने आया है। गुरुर ब्लॉक के ग्राम नारागांव की दर्जनों महिलाओं ने अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय जांच और बैंक ऋण से मुक्ति दिलाने की मांग की।

पीडि़तों ने लगाया धोखाधड़ी का आरोप

बालोद जिले में महिलाओं के नाम पर फर्जी ऋण लेकर ठगी का मामला सामने आया है। गुरुर ब्लॉक के ग्राम नारागांव की दर्जनों महिलाओं ने अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय जांच और बैंक ऋण से मुक्ति दिलाने की मांग की। पीडि़त महिलाओं का आरोप है कि गांव के ही कुछ लोगों ने अधिक मुनाफे का लालच देकर उनके नाम पर विभिन्न बैंकों और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से लाखों रुपए का कर्ज निकलवा लिया। जब किस्तें नहीं भरी तो बैंक और वित्तीय संस्थाएं महिलाओं के घर पहुंचकर वसूली कर रही हैं। इससे परिवार परेशान हैं।

यह है मामला

महिलाओं ने ज्ञापन में ग्राम नारागांव निवासी सरिता करियाम, चंद्रहास करियाम और खोरबाहरा केवट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिलाओं का कहना है कि आरोपियों ने उन्हें सरकारी योजना और कम ब्याज पर मोटा मुनाफा का झांसा दिया। भरोसा जीतने के लिए उन्होंने कहा कि ऋण की किस्त वे खुद जमा करेंगे और महिलाओं को कुछ नहीं करना पड़ेगा। इसके बाद अपने आधार, बैंक पासबुक और अन्य दस्तावेज आरोपियों को सौंप दिए। उनके नाम पर बैंकों और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से ऋण स्वीकृत कराया गया। ऋण की पूरी राशि उन्होंने अपने पास रख ली। शुरुआत में 2 से 3 महीने तक किस्तें जमा कीं। इससे किसी तरह का संदेह नहीं हुआ। कुछ समय बाद किस्तें जमा होना बंद हो गईं। अब बैंक और माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से महिलाओं के पास लगातार फोन, एसएमएस और नोटिस आ रहे हैं। रिकवरी एजेंट घर पहुंचकर भुगतान के लिए दबाव बना रहे हैं।

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2024 में भी हुई थी बड़ी धोखाधड़ी

यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2024 में भी जिले के नारागांव, किनारगोंदी सहित कई गांवों की सैकड़ों महिलाओं ने इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराई थीं। तब महिलाओं ने आरोप लगाया था कि समूह के नाम पर उनसे दस्तावेज लेकर ऋण निकाल लिया गया। पुलिस ने जांच के बाद सरिता करियाम, चंद्रहास करियाम और खोरबाहरा केवट को धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया था। महिलाओं का कहना है कि जेल से छूटने के बाद आरोपियों ने फिर से इसी तरह की ठगी शुरू कर दी है।

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आर्थिक रूप से कमजोर हैं महिलाएं

अधिकांश महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से हैं। उनके लिए 2 से 4 लाख रुपए तक की बकाया राशि जमा करना संभव नहीं है। महिलाएं कहती हैं कि उन्होंने ऋण का उपयोग नहीं किया, फिर भी अब वे कर्जदार बन गई हैं।

इन बैंक और फाइनेंस कंपनियों से जुड़ा मामला

पीडि़त महिलाओं ने बताया कि उनके नाम पर एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईडीएफसी फस्र्ट बैंक, सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक, जना स्मॉल फाइनेंस बैंक, स्पंदना स्फूर्ति, एलएंडटी फाइनेंस, अन्नपूर्णा फाइनेंस, सत्या माइक्रो कैपिटल, ग्राम शक्ति सहित कुल 17 बैंक एवं माइक्रो फाइनेंस संस्थानों से ऋण स्वीकृत कराया गया है।

दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी

अपर कलेक्टर बालोद चंद्रकांत कौशिक ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। किसी भी महिला को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं होने दिया जाएगा।