
Ugeshwar Thakur Funeral: बालोद जिले के गांव छेड़िया में बुधवार दोपहर जैसे ही तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव की सीमा में दाखिल हुआ, पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। हर तरफ से एक ही आवाज सुनाई दी-“हमारा उगेश्वर चला गया।” गुरुर ब्लॉक के इस छोटे से गांव का बेटा और CRPF जवान 45 वर्षीय उगेश्वर ठाकुर आखिरी बार तिरंगे में लिपटकर अपने गांव लौटा।
सुकमा में देश की सेवा करते हुए बीमार पड़े उगेश्वर ठाकुर (Ugeshwar Thakur) पिछले कुछ महीनों से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे। रायपुर के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, लेकिन जिंदगी बचाने की हर कोशिश नाकाम रही। मंगलवार को जवान ने हमेशा के लिए आंखें मूंद लीं। उनके निधन की खबर मिलते ही सुकमा में रह रहा परिवार ही नहीं, बल्कि उनके पैतृक गांव छेड़िया में भी मातम छा गया।
बुधवार को जैसे ही पार्थिव शरीर लेकर वाहन गांव की सीमा में पहुंचा, युवाओं ने तिरंगा यात्रा शुरू कर दी। गांव के मुख्य मार्ग पर स्कूली बच्चों ने मानव शृंखला बनाकर जवान के पार्थिव शरीर पर फूल बरसाए। इस दौरान पूरा गांव देशभक्ति के नारों से गूंज उठा। “भारत माता की जय” और “उगेश्वर अमर रहे” के नारों से माहौल भावुक हो गया।
उगेश्वर ठाकुर की 70 वर्षीय मां मुरही बाई जब ताबूत से लिपटकर रोईं तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। पत्नी त्रिवेणी पति के अंतिम दर्शन करते हुए बेसुध हो गईं। बेटा वैभव और बेटी ने कांपते हाथों से पिता को अंतिम सलामी दी।
पिता को अंतिम विदाई देते समय बेटे वैभव की आंखों में दर्द साफ दिखाई दे रहा था। जब वैभव ने कांपते हाथों से पिता की चिता को मुखाग्नि दी, तो पूरा गांव सिसक उठा। इस भावुक पल में वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं।
जवान की अंतिम यात्रा के दौरान गांव के युवाओं ने तिरंगा यात्रा निकाली। स्कूली बच्चे कतार में खड़े होकर पार्थिव शरीर पर फूल बरसाते रहे। पूरे गांव में देशभक्ति के गीत गूंजते रहे। वहीं, बीच-बीच में परिजनों के रोने की आवाज माहौल को और भावुक कर रही थी। CRPF के साथियों ने भी अपने साथी जवान को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी। हथियार झुकाकर दी गई अंतिम सलामी के साथ उगेश्वर ठाकुर को अंतिम विदाई दी गई। गांव ने नम आंखों से अपने उस लाल को विदा किया, जिसने देश की सेवा करते हुए अपनी अंतिम सांस ली।