बालोद

Teejan Bai: बालोद से था तीजन बाई का खास नाता, 2016 में पंडवानी के साथ दिया था ‘बेटी पढ़ाओ’ का संदेश

Teejan Bai Balod Visit: अंतरराष्ट्रीय पंडवानी गायिका पद्मश्री और पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का बालोद जिले से भी खास जुड़ाव रहा। साल 2016 में उन्होंने ग्राम तरौद में आयोजित एक कार्यक्रम में अपनी दमदार पंडवानी प्रस्तुति से लोगों का मन मोह लिया था।
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Jul 06, 2026
Teejan Bai
तीजन बाई (photo-patrika)

Teejan Bai News: अंतराष्ट्रीय पंडवानी गायिका पद्मश्री, पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई ने 70 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। उनका बालोद से भी गहरा जुड़ाव रहा। तीजन बाई 20 दिसंबर साल 2016 में तरौद में स्व. देवी रामबति हायर सेकंडरी स्कूल में आयोजित स्व. देवी रामबति रजत जयंती समारोह में हिस्सा लेकर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया था। उन्होंने पालकों से हर बच्चों को शिक्षा ग्रहण कराने का संकल्प भी दिलाया था और पंडवानी की प्रस्तुति भी दी थी।

बालोद के साहित्यकार ने लिखी थी तीजन बाई फिल्म की कहानी

साल 2025 में पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई पर बनी फिल्म में कोहंगाटोला निवासी साहित्यकार, कवि डॉ. अशोक आकाश ने तीजन बाई की जीवनी व फिल्म की कहानी लिखी थी। साहित्यकार डॉ. परदेशी राम वर्मा ने भी फिल्म की आधी कहानी लिखी थी। साल 2024 में फिल्म की शूटिंग हुई थी और साल 2025 में फिल्म बनकर तैयार हुई।

तीजन के पास था कला व शब्दकोष का भंडार

साहित्यकार डॉ. अशोक आकाश ने बताया कि पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई छत्तीसगढ़ की एक विश्व प्रसिद्ध पंडवानी लोक गायिका हैं, जिन्होंने भारत की पारंपरिक लोक कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाई। उन्होंने मात्र 13 साल की उम्र में अपनी पहली प्रस्तुति दी थी। वे महाभारत की कथाओं को संगीत और अनूठे अभिनय के माध्यम से दर्शकों के सामने जीवंत करने के लिए जानी जाती हैं।

उन्होंने बताया कि आखिरी बार साल 2024 में मुलाकात हुई थी। डॉ. आकाश ने बताया कि तीजन बाई के पास शब्दकोश का भंडार था। बुलंद आवाज और रौद्र रूप उनकी कड़कड़ाती दमदार आवाज, चेहरे के तीव्र हाव-भाव और ओजस्वी अभिनय शैली के कारण जब वह मंच पर महाभारत का युद्ध या द्रौपदी चीरहरण जैसा प्रसंग सुनाती थीं, तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते थे।। उनका निधन होना छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति के क्षेत्र में एक बड़ी क्षति है।

Teejan bai: पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई

कभी इंदिरा गांधी के सामने अपनी प्रस्तुति से राष्ट्रीय पहचान बनाने वाली तीजन बाई ने संघर्षों के बीच पंडवानी को दुनिया के सबसे बड़े मंचों तक पहुंचाया और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाई। तीजन बाई का जन्म भिलाई के समीप स्थित गनियारी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम हुकुमचंद परधा और माता का नाम सुखवाती बाई था। अपनी दमदार आवाज और अद्भुत प्रस्तुति से उन्होंने महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत किया और पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

Updated on:
06 Jul 2026 12:16 pm
Published on:
06 Jul 2026 12:16 pm