बालोद जिले में ठंडे पानी का चलन बढ़ गया है। लेकिन पानी की जांच व गुणवत्ता को लेकर जिले के अधिकारी सुस्त हैं। पीएचई विभाग व खाद्य औषधि प्रशासन की टीम अभी तक पानी का सैंपल नहीं ले पाई है। हालांकि लोकसभा चुनाव से पहले कोल्ड्रिंग्स व पानी बोतलों की जांच की गई थी लेकिन जहां पानी का प्लांट है, वहां पर अभी तक टीम ने दस्तक नहीं दी है।
water plant बालोद जिले में ठंडे पानी का चलन बढ़ गया है। लेकिन पानी की जांच व गुणवत्ता को लेकर जिले के अधिकारी सुस्त हैं। पीएचई विभाग व खाद्य औषधि प्रशासन की टीम अभी तक पानी का सैंपल नहीं ले पाई है। हालांकि लोकसभा चुनाव से पहले कोल्ड्रिंग्स व पानी बोतलों की जांच की गई थी लेकिन जहां पानी का प्लांट है, वहां पर अभी तक टीम ने दस्तक नहीं दी है। ऐसे में यह लापरवाही लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। अधिकारियों ने चुनावी कार्य में व्यस्तता होने के कारण जांच नहीं करने बात कही है।
बड़े शहरों की तर्ज पर अब जिले में भी जगह-जगह मिनरल वाटर ठंडे पानी का कारोबार जोरों पर है। बंद बोतल व पाउच में ठंडा व मिनरल वाटर देने के नाम पर खेल चल रहा है। न जांच न माप। बिना किसी लैब जांच के सीधे बोर के पानी को ठंडा कर बेचा जा रहा है, जिसे लोग पीकर बीमार भी पड़ सकते हैं। दुकानों में बिक रहे पानी पाउच में सबसे ज्यादा दिक्कत है। कई कंपनियों ने पानी पाउच की पैकिंग व एक्सपायरी तिथि का जिक्र नहीं किया है। लोग इसे खरीदकर पी रहे हैं। गर्मी के दिनों में लोगों को ठंडा पानी चाहिए, इसलिए डिमांड अधिक रहती है।
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कई जगहों पर आरो व फिल्टर पानी के नाम पर सीधे बोर के पानी को ठंडा कर दिए जाने का भी मामला सामने आया है। कहीं जिले के पानी प्लांट में भी तो सीधे बोर का पानी ठंडा कर तो नहीं दिया जा रहा है। फिलहाल वर्तमान में पानी की जांच भगवान भरोसे चल रही है।
ठंडा व आरओ पानी की मांग शादी सीजन व गर्मी में ज्यादा रहती है। शहर में भी चील्ड वाटर का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। घर-घर व दुकानों में भी पानी की सप्लाई हो रही है। हालांकि कई कंपनी पानी की बराबर जांच करवाती हैं, वहीं कई लापरवाही बरतते हैं। अब ऐसे लोगों पर विभाग की नजर है, जो लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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