बालोद

Sugar crisis: शुगर मिल पर गन्ने का संकट, भुगतान में देरी से टूटा किसानों का भरोसा

Sugar mill crisis: गन्ने का रकबा लगातार घट रहा है। भुगतान में देरी और 95 लाख रुपए बोनस लंबित होने से किसान गन्ने की जगह धान की खेती की ओर बढ़ रहे हैं।
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Oct 08, 2026
Balod Sugar mill
भुगतान में देरी से किसान चिंतित (photo Patrika)

Balod Sugar mill crisis: बालोद जिले की एकमात्र सहकारी शक्कर मिल के सामने गन्ने की कमी का संकट गहराता जा रहा है। चार साल में जिले में गन्ने का रकबा करीब 1215 हेक्टेयर घट गया है। किसानों की नाराजगी की बड़ी वजह गन्ने के भुगतान और बोनस में देरी बताई जा रही है। दिसंबर में नया पेराई सत्र शुरू होना है और मिल में मेंटेनेंस की तैयारी चल रही है, लेकिन पर्याप्त गन्ना नहीं होने से मिल को लंबे समय तक चलाना चुनौती बन गया है।

2022 के बाद लगातार सिमटती गई खेती

कृषि विभाग के अनुसार खरीफ 2026 में जिले में 730 हेक्टेयर में गन्ना लगाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक 585 हेक्टेयर में ही बुवाई हुई है। गन्ना उत्पादक किसान संघ के अनुसार 2010 से 2022-23 तक करीब 1500 से 2000 किसान 1800 हेक्टेयर तक गन्ने की खेती करते थे। 2023 के बाद किसानों की संख्या घटकर औसतन 700 रह गई और रकबा 500-600 हेक्टेयर तक सिमट गया।

1215 हेक्टेयर घटा रकबा — चार साल में जिले में गन्ने की खेती का क्षेत्रफल करीब 1215 हेक्टेयर कम हुआ।
585 हेक्टेयर में ही बुवाई — 2026 में 730 हेक्टेयर का लक्ष्य था, लेकिन अब तक 585 हेक्टेयर में ही गन्ना लगाया गया।
किसान भी घटे — 2022-23 तक 1500-2000 किसान गन्ना उगाते थे, अब औसतन 700 किसान ही रह गए हैं।
मिल को चाहिए 3500 हेक्टेयर — पांच महीने लगातार मिल चलाने के लिए करीब 3500 हेक्टेयर में गन्ने की जरूरत है।
दो लाख टन गन्ने की जरूरत — क्षमता से पेराई के लिए करीब 2 लाख मीट्रिक टन गन्ना चाहिए।
तीन महीने भी नहीं चलती मिल — गन्ने की कमी के कारण मिल पांच महीने तो दूर, तीन महीने भी नियमित रूप से नहीं चल पाती।
95 लाख रुपए बोनस बाकी — किसानों का मूल भुगतान होने के बाद भी करीब 95 लाख रुपए बोनस राशि लंबित है।
90 प्रतिशत सब्सिडी — कृषि विभाग गन्ने के बीज पर 90 प्रतिशत सब्सिडी देकर किसानों को खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

नहीं मिल रहा पर्याप्त उत्पादन

कारखाना प्रबंधन के अनुसार मिल को लगातार पांच महीने चलाने के लिए करीब 3500 हेक्टेयर में गन्ना और दो लाख मीट्रिक टन उत्पादन की जरूरत है। वर्तमान स्थिति में पर्याप्त गन्ना उपलब्ध नहीं होने से मिल तीन महीने भी नियमित रूप से नहीं चल पाती। गन्ने की कमी से बार-बार ब्रेकडाउन की स्थिति सामने आती है।

बीज पर 90 प्रतिशत सब्सिडी, फिर भी रकबा नहीं बढ़ा

कृषि विभाग किसानों को गन्ने की खेती के लिए प्रोत्साहित करने और बीज पर 90 प्रतिशत सब्सिडी देने की बात कह रहा है। वहीं कारखाना प्रबंधन का कहना है कि बोनस भुगतान की प्रक्रिया चल रही है और किसानों को गन्ना उत्पादन के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि केवल सब्सिडी और प्रोत्साहन से रकबा नहीं बढ़ेगा। समय पर भुगतान और गन्ने का उचित दाम मिलने पर ही किसान दोबारा गन्ने की ओर लौटेंगे।

भुगतान की देरी ने बढ़ाई नाराजगी

गन्ने के भुगतान में देरी को लेकर किसान पिछले सप्ताह कलेक्ट्रेट गेट के सामने धरने पर भी बैठे थे। प्रशासन ने एक सप्ताह में भुगतान का आश्वासन दिया था। प्रबंधन के अनुसार किसानों के गन्ने की राशि का भुगतान किया जा चुका है, लेकिन करीब 95 लाख रुपए बोनस की राशि अब भी लंबित है। किसानों का कहना है कि भुगतान में बार-बार देरी से गन्ने की खेती करना आर्थिक रूप से जोखिम भरा हो गया है।

अब धान ज्यादा भरोसेमंद

ग्राम सुंदरा के किसान छगन देशमुख ने बताया कि उन्होंने 2010 से 2025 तक करीब 20 एकड़ में गन्ना लगाया, लेकिन अब धान की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि धान का समर्थन मूल्य लगातार बढ़ रहा है, जबकि गन्ने के भुगतान में महीनों की देरी होती है। ऐसे में किसान गन्ने से दूरी बना रहे हैं। किसानों को गन्ना लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कोशिश है कि जिले के किसानों के गन्ने से ही कारखाना चले। दिसंबर से पहBalod Sugar mill crisis: बालोद जिले की एकमात्र सहकारी शक्कर मिल के सामने गन्ने की कमी का संकट गहराता जा रहा है। चार साल में जिले में गन्ने का रकबा करीब 1215 हेक्टेयर घट गया है। किसानों की नाराजगी की बड़ी वजह गन्ने के भुगतान और बोनस में देरी बताई जा रही है। दिसंबर में नया पेराई सत्र शुरू होना है और मिल में मेंटेनेंस की तैयारी चल रही है, लेकिन पर्याप्त गन्ना नहीं होने से मिल को लंबे समय तक चलाना चुनौती बन गया है।

किसानों को गन्ना लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कोशिश है कि जिले के किसानों के गन्ने से ही कारखाना चले। दिसंबर से पहले मेंटेनेंस का काम पूरा कर लिया जाएगा।

-सतीश पाटले, जीएम, शक्कर कारखाना

Updated on:
08 Oct 2026 01:47 pm
Published on:
08 Oct 2026 01:47 pm