
Krishna Awasthi Case: बलौदाबाजार जिले में नौकरी दिलाने और ट्रांसफर कराने के नाम पर कथित ठगी के मामलों को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। भाजपा से निष्कासित पूर्व जिला महामंत्री कृष्ण अवस्थी और उनके पुत्र प्रणव अवस्थी पर लगे आरोपों के बीच भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। भाजपा ने मामले को व्यक्तिगत बताते हुए कृष्ण अवस्थी से दूरी बना ली है, जबकि कांग्रेस ने पार्टी की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। कृष्ण अवस्थी के खिलाफ नौकरी दिलाने और अन्य काम कराने के नाम पर रकम लेने की शिकायतें सामने आई हैं। इन मामलों को लेकर जिले में चर्चा तेज है। वहीं, भाजपा के निष्कासन संबंधी फैसले के बाद भी राजनीतिक बयानबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है।
बलौदाबाजार भाजपा जिलाध्यक्ष आनंद यादव ने कहा कि कृष्ण अवस्थी का मामला पूरी तरह व्यक्तिगत है और भारतीय जनता पार्टी का इससे कोई संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी किसी भी व्यक्ति को नौकरी दिलाने, ट्रांसफर कराने या मनचाही पोस्टिंग दिलाने का दावा नहीं करती। आनंद यादव के मुताबिक, जैसे ही यह मामला पार्टी के संज्ञान में आया, कृष्ण अवस्थी को बिना देरी किए निष्कासित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा स्वच्छ छवि वाले कार्यकर्ताओं और नेताओं को प्राथमिकता देती है। पार्टी की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि नौकरी और ट्रांसफर की प्रक्रिया शासन के निर्धारित नियमों के तहत होती है।
भाजपा जिलाध्यक्ष ने आम लोगों से अपील की कि यदि कोई व्यक्ति पार्टी का नेता या कार्यकर्ता होने का हवाला देकर नौकरी लगवाने, ट्रांसफर कराने या पोस्टिंग दिलाने का भरोसा देता है, तो उसके झांसे में न आएं। उन्होंने कहा कि नियुक्तियों में निर्धारित नियमों और मेरिट को प्राथमिकता दी जाती है। इसलिए किसी के राजनीतिक संपर्कों या पद का हवाला देकर पैसे मांगने पर सावधान रहना चाहिए।
दूसरी ओर, वरिष्ठ कांग्रेस नेता शैलेश नितिन त्रिवेदी ने इस मामले को लेकर भाजपा पर हमला बोला है। उन्होंने भाजपा कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पार्टी कार्यालय में पैसों के लेन-देन से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हुए हैं। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने कार्यालय को वसूली का अड्डा बना लिया है। उन्होंने कहा कि केवल कृष्ण अवस्थी को पार्टी से निष्कासित कर देने से भाजपा अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकती। कांग्रेस नेता के अनुसार, इस मामले में पार्टी की भूमिका और जवाबदेही को लेकर भी सवालों के जवाब सामने आने चाहिए। हालांकि, ये कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्षों को सामने आना बाकी है।
गौरतलब है कि कृष्ण अवस्थी और उनके पुत्र प्रणव अवस्थी के खिलाफ नौकरी दिलाने और अन्य काम कराने के नाम पर कथित तौर पर रकम लेने की शिकायतें सामने आई हैं। भाटापारा में देशी शराब दुकान में सेल्समैन की नौकरी दिलाने का झांसा देकर 2.09 लाख रुपये लेने के आरोप में भी पुलिस ने मामला दर्ज किया था। इसके अलावा, अन्य शिकायतों और कथित लेन-देन को लेकर भी मामले चर्चा में हैं। आरोप है कि नौकरी और ट्रांसफर कराने का भरोसा देकर लोगों से पैसे लिए गए। इन मामलों में आरोपों की सच्चाई का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होना है। आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों को अदालत में साबित होना बाकी है।
कृष्ण अवस्थी को पार्टी से निष्कासित करने के बाद भाजपा ने इस मामले को व्यक्तिगत बताकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। वहीं, कांग्रेस इस कदम को पर्याप्त नहीं मानते हुए पार्टी की जवाबदेही पर सवाल उठा रही है।फिलहाल, यह मामला कानूनी जांच के साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। आगे की जांच में सामने आने वाले तथ्य और पुलिस की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित ठगी के मामलों में किन लोगों की क्या भूमिका रही और शिकायतों के आधार पर आगे क्या कार्रवाई होती है।