
Body Donation: इंसान की जिंदगी खत्म होने के बाद भी उसका शरीर किसी जरूरतमंद के काम आ सकता है और किसी के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगा सकता है। इसी सोच को आत्मसात करते हुए बलौदाबाजार जिले के दो दंपतियों ने मृत्योपरांत देहदान करने का संकल्प लिया है। दोनों दंपतियों ने स्वप्रेरणा से देहदान के लिए फार्म भरकर अपनी इच्छा दर्ज कराई है। उनके इस मानवीय और जनकल्याणकारी पहल की सराहना करते हुए स्वास्थ्य मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने उन्हें सम्मानित किया।
यह पहल जिले में चलाए जा रहे ‘सेवा ही संकल्प’ अभियान के तहत सामने आई है। देहदान का संकल्प लेने वाले दोनों दंपतियों का कहना है कि जीवन समाप्त होने के बाद भी यदि उनके शरीर का कोई हिस्सा किसी जरूरतमंद, असहाय या रोगग्रस्त व्यक्ति के काम आ सके और किसी को नया जीवन मिल सके, तो इससे बड़ी सेवा उनके लिए कोई नहीं हो सकती।
कसडोल विकासखंड के ग्राम बम्हनीडीह निवासी फिरतराम साहू और उनकी पत्नी पुष्पा साहू ने मृत्योपरांत देहदान करने का निर्णय लिया है। दंपति ने बताया कि उन्हें देहदान के लिए अपने गुरु से प्रेरणा मिली। गुरु की सीख ने उन्हें यह सोचने के लिए प्रेरित किया कि शरीर का उपयोग केवल जीवन तक सीमित नहीं होना चाहिए। मृत्यु के बाद भी यदि शरीर का कोई अंग किसी जरूरतमंद के काम आ जाए, तो यह मानव सेवा का बड़ा माध्यम बन सकता है।
इसी विचार से प्रेरित होकर दोनों ने देहदान का फैसला लिया। खास बात यह है कि उनके इस निर्णय में परिवार के सदस्यों की भी सहमति है। दंपति का कहना है कि मृत्यु के बाद शरीर को केवल अंतिम संस्कार तक सीमित रखने के बजाय यदि उससे किसी जरूरतमंद को लाभ मिल सके, तो समाज के लिए इससे बेहतर योगदान कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने लोगों से भी मृत्योपरांत देहदान के लिए आगे आने की अपील की। उनका कहना है कि देहदान को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस मानवीय पहल का हिस्सा बन सकें।
वहीं, भाटापारा विकासखंड के वेदराम आनंद और उनकी पत्नी रेशमा ने भी मृत्योपरांत देहदान करने का संकल्प लिया है। इस दंपति को देहदान की प्रेरणा समाचार पत्र में प्रकाशित एक खबर के माध्यम से मिली। अखबार में किडनी की आवश्यकता से जुड़ी जानकारी पढ़ने के बाद उनके मन में जरूरतमंदों की मदद करने का विचार आया।
इसके बाद दोनों स्वप्रेरणा से सीएचसी भाटापारा पहुंचे और डॉक्टर से मुलाकात कर देहदान की इच्छा व्यक्त की। डॉक्टर से आवश्यक जानकारी लेने के बाद दंपति ने देहदान के लिए फार्म भरा और मृत्यु के बाद देहदान करने की घोषणा की।
वेदराम आनंद और रेशमा का यह निर्णय भी समाज में अंगदान और देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला संदेश दे रहा है। उनका मानना है कि मृत्यु के बाद भी यदि शरीर किसी दूसरे व्यक्ति के लिए उपयोगी साबित हो सके, तो यह मानवता के लिए महत्वपूर्ण योगदान होगा।
कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने बताया कि जिले में ‘सेवा ही संकल्प’ अभियान के तहत लोगों को सेवा और जनकल्याण से जुड़ी गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसी क्रम में जिले के दो दंपतियों ने स्वप्रेरणा से मृत्योपरांत देहदान करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि देहदान के साथ ही जिले में रक्तदान को लेकर भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। विभिन्न स्थानों पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें लोग आगे आकर रक्तदान कर रहे हैं। जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में ऐसे शिविर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
देहदान का संकल्प लेने वाले दोनों दंपतियों की जनकल्याण की भावना को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कलेक्टर सभाकक्ष में उनका सम्मान किया। उन्होंने दोनों दंपतियों को शाल और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके इस निर्णय की सराहना की। इस अवसर पर रक्तदान के लिए आगे आने वाली जिला पंचायत अध्यक्ष आकांक्षा जायसवाल को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में देहदान और रक्तदान जैसे मानवीय कार्यों के जरिए समाज में सेवा भावना को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
दोनों दंपतियों का देहदान का संकल्प समाज के लिए एक संदेश भी है कि सेवा की भावना केवल जीवन तक सीमित नहीं होती। सही जानकारी और जागरूकता के साथ लोग मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा में योगदान दे सकते हैं। दंपतियों ने लोगों से अपील की कि वे देहदान और रक्तदान के महत्व को समझें और अपनी इच्छा के अनुसार ऐसे जनकल्याणकारी कार्यों से जुड़ने के लिए आगे आएं।