CG News: छत्तीसगढ़ से बाहर भी जा सकता है। प्रशिक्षण के बाद वन विभाग ने उत्पादों को राज्य के बड़े शहरों की प्रदर्शनी और बिक्री तक पहुंचाने की योजना बनाई है।
CG News: जैव विविधता से परिपूर्ण बलौदाबाजार जिले का बारनवापारा अभयारण्य बैंबू क्राफ्ट के लिए भी पहचाना जाने लगा है। सूप-टोकरियों के बाद अब यहां बांस की चूड़ी, झुमके और मंगलसूत्र बनाए जा रहे हैं। गुवाहटी से आई बांस शिल्पकला में माहिर महिलाएं यहां कमार और बसोड़ समुदाय के लोगों को बैंबू क्राफ्ट बनाने में पारंगत कर रहीं हैं। यह बदलाव वन विभाग के खास खास प्रशिक्षण कार्यक्रम से आया है, जिसके तहत ग्रामीणों को बांस से ज्वेलरी और डेकोरेटिव आइटम्स बनाना सिखाया जा रहा है। ट्रेनर कृष्णा सिन्हा बताती हैं, शहरों में बांस से बनी चीजों की बहुत मांग है। महिलाएं ये कला सीखकर गांव छोड़े बिना भी अच्छी कमाई कर सकती हैं।
स्थानीय महिला राधा बंसोड़ कहती हैं कि पहले हम बांस से केवल सूप और टोकरियां बनाते थे। अब मंगलसूत्र, पर्स और झूमके भी बना रहीं हैं। यह हमारा नया रोजगार है। सरकार अगर मार्केटिंग में मदद करे तो हमारा सामान छत्तीसगढ़ से बाहर भी जा सकता है। प्रशिक्षण के बाद वन विभाग ने उत्पादों को राज्य के बड़े शहरों की प्रदर्शनी और बिक्री तक पहुंचाने की योजना बनाई है। इन्हें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोडऩे की भी तैयारी है, जिससे देशभर में इन उत्पादों की बिक्री हो सके।
सूप और टोकरियां बनाने में जहां ज्यादा बांस की जरूरत पड़ती है, वहीं इनसे बनी ज्वेलरी काफी कम मटेरियल में तैयार हो जाती है। ग्रामीण बताते हैं कि सूप और टोकरियां बनाने के बाद जो वेस्ट मटेरियल बच जाता है, उनसे वे ज्वेलरी और पर्स बनाने का काम कर रहे हैं। कम मटेरियल से बनने वाले ये सामान ज्यादा कीमत में बिकते हैं। इससे उन्हें मुनाफा भी ज्यादा होता है।