
राजपर. बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के राजपुर विकासखंड अंतर्गत वन बिट दुप्पी व ओकरा के पतरापारा क्षेत्र में हाथियों का दल पिछले एक सप्ताह से अलग-अलग दल बनाकर उत्पात मचा रहा है। हाथियों के दल ने मंगलवार की रात २ ग्रामीणों के मकान को तोडऩे के साथ ही फसल को भी नुकसान पहुंचाया। वतर्मान में 24 हाथियों का दल दुप्पी के बीट-2 व दलदलिया में डेरा जमाए हुए है।
इसके साथ ही 28 हाथिओं का दल ओकरा बिट के पतरापारा में डटा है। इधर हाथी से प्रभावित लोगों से सामरी विधायक डॉ. प्रीतम राम ने मुलाकात कर उनका हालचाल जाना तथा विधानसभा में हाथियों के संबंध में पूछे गए सवालों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वनमंत्री के अनुसार पिछले 5 साल में 199 लोगों को हाथी मौत के घाट उतार चुके हैं।
मंगलवार की रात 24 हाथियों के दल ने ग्राम दुप्पी के परसवारकला निवासी सोनिया पति बालचन्द घसिया तथा सुंदर साय पिता गेंदा राम गोंड़ के मकान को तोड़ डाला। इसकेबाद सोमार साय पिता प्रयास गोंड़ के गन्ना की फसल को भी रौंदकर चले गए।
हाथिओं के डर से ग्रामीण रतजगा करने को विवश हैं। इधर वन अमला ग्रामीणों को हाथियों से बचने के उपाय बताने के साथ उनसे दूर रहने की सलाह दे रहा है।
प्रभावितों से मिले विधायक
मंगलवार को सामरी विधायक डॉ प्रीतम राम भी ग्राम दुप्पी चौरा व मरकाडांड़ पहुंच कर हाथी प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनका कुशल मंगल जानने का प्रयास किया। डॉ. प्रीतम राम ने यह भी बताया कि विधानसभा सत्र में वन मंत्री से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि बीते पांच वर्ष में हाथियों से अब तक 199 मौत हो चुकी है।
इसके अलावा लगभग 7 हजार मकान को हाथियों के द्वारा नुकसान पहुंचाया जा चुका है । वहीं लगभग 32952.891 हेक्टेयर फसल को हाथियों ने नुकसान पहंचाया है।
गज आतंक से निपटने में विभाग असफल
विधायक ने बताया कि पिछले 5 वर्षों में गज आंतक से निपटने के लिए कोई ठोस कदम उठाने में वन विभाग असफल रहा है । इससे प्रभावित क्षेत्र के लोगो को हाथियों के आने की आहट लगते ही घर छोडऩे को मजबूर होना पड़ता है। इससे पीडि़तों के सामने घर मे रहने व भोजन की समस्या खड़ी हो जाती है।
इस दौरान उनके साथ नगर पंचायत अध्यक्ष विजय सिंह, पूर्व पार्षद पूरनचंद जायसवाल सहित अन्य लोग उपस्थित थे। मौके पर वन विभाग के एसडीओ जेआर भगत, रेंजर अनिल सिंह, रामप्रताप राही, सुशील ठाकुर, मनोज जायसवाल द्वारा ग्रामीणों को पंपलेट, टार्च व मशाल वितरित किया जा रहा था।