बलरामपुर

यहां नहीं चलता शासन-प्रशासन का नियम, जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारी तक बने हुए हैं मूकदर्शक

Sand smuggling: ग्रीन ट्रिब्यूनल (Green Tribunal) की रोक के बाद भी पांगन नदी का सीना चीर रहे 8 पोकलेन मशीन, मजाक बने शासकीय आदेश (Governmental order), 200 से अधिक ट्रकों से प्रतिदिन हो रहा रेत का परिवहन (Sand transporting), लीज एरिया से हटकर धड़ल्ले से जारी है अवैध खनन

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Poklane machine and truck came for illegal sand mining

रामानुजगंज. बलरामपुर जिले के दूरस्थ उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे गांव तक जाते-जाते प्रशासनिक व्यवस्था मजाक बनकर रह जाती है। ग्रीन ट्रिब्यूनल (Green Tribunal) की रोक एवं प्रशासन के सख्त निर्देश के बाद भी जिस तरह से यहां रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है। इससे यहां प्रशासनिक व्यवस्था शून्य नजर आती हैं।

यहां तक की मंत्री-विधायक से लेकर अधिकारी भी मौन धारण किए हुए हैं। यहां 200 से अधिक ट्रक एवं 8 से अधिक पोकलेन मशीन पांगन नदी से अवैध रेत उत्खनन में संलग्न है। स्थिति ऐसी है कि ग्रामीण लगातार अवैध रेत उत्खनन का विरोध कर रहे हैं।

वहीं ठेकेदार अवैध रेत उत्खनन करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में ठेकेदारों के लठैतों एवं ग्रामीणों के बीच संघर्ष की स्थिति कई बार निर्मित हो चुकी है। यही स्थिति रही तो आने वाले समय में होने वाले नुकसान की कल्पना भी नहीं की जा सकती।


गौरतलब है कि जब से पांगन नदी में रेत उत्खनन (Sand mining)के लिए रेत खदान की नीलामी हुई है, तब से लेकर आज तक लगातार नियम-कायदे कानून को धता बताकर अवैध रेत उत्खनन करने का आरोप ग्रामीण लगाते रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि लीज कहीं का एवं खनन कहीं और होता आ रहा है।

यहां तक कि उत्खनन के लिए खनिज विभाग द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के विपरीत जाकर भी खनन कार्य लगातार किए गए जिसे लेकर ग्रामीण कई बार लामबंद भी हुए।

यहां तक कि कई बार आंदोलन भी हुए एवं संघर्ष की स्थिति भी निर्मित हुई परंतु इसके बाद भी रेत उत्खनन में जमकर मनमानी की जा रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के रोक के बाद भी सनावल क्षेत्र में धड़ल्ले से रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है। स्थिति ऐसी है कि 200 से अधिक ट्रक एवं 8 से अधिक पोकलेन मशीन रेत उत्खनन में संलग्न हैं।


टू-लेन सड़क को दे रहे थ्री लेन का स्वरूप
ग्राम त्रिशूली के महुआ घाट में वन भूमि जहां पर वन विभाग के द्वारा पौधरोपण किया गया था परंतु रेत के अवैध उत्खनन करने के लिए रेत माफियाओं द्वारा हजारों पेड़ पौधों की बलि देते हुए यहां पर टू लेन सड़क का निर्माण कर दिया गया था।

यहां विरोध स्वरूप राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम (MP of State Assembly) ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ पौधरोपण किया था परंतु अब यहां सड़क के अत्यंत जर्जर हो जाने के कारण अब उसे थ्री लेन सड़क का स्वरूप देने में रेत तस्कर लगे हैं।


लंबा चला था ग्रामीणों का आंदोलन
पांगन नदी में हो रहे अवैध रेत उत्खनन को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण पांगन नदी में हफ्तों अवैध रेत उत्खनन का विरोध करते हुए धरने पर बैठ रहे थे। स्थिति ऐसी थी कि रात दिन ग्रामीण नदी में ही धरना देकर बैठ गए थे। यहीं पर भजन-कीर्तन होता था एवं भोजन-पानी भी यहीं पर हो रहा था।

IMAGE CREDIT: Illegal sand

ग्रामीण विकास को लगा ग्रहण
जिस-जिस गांव में रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है उस उस गांव के विकास को भी ग्रहण लग रहा है। क्योंकि रेत से ओवरलोड ट्रक ग्रामीण सड़कों पर चल रहे है जिससे सड़कों की भी स्थिति अत्यंत दयनीय होती जा रही है। जिस-जिस रास्ते से रेत लोड ट्रक गुजर रहे हैं, उन रास्तों की ऐसी स्थिति हो गई है कि वहां बरसात के समय तो पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में गांव के विकास को भी ग्रहण लग रहा है।


संकट में नदी का अस्तित्व
जिस प्रकार से पांगन नदी (Pangan River) में रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है। उससे नदी के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा हो रहा है क्योंकि लगातार रेत के उत्खनन किए जाने से कई स्थानों पर रेत ही खत्म हो गए हैं। स्थिति ऐसी हो गई है कि वहां पर अब पेड़ पौधे जमना शुरू हो गए हैं जिससे आने वाले समय में क्षेत्र में रेत मिलना भी मुश्किल हो जाएगा और नदी अपना अस्तित्व ही खो देगी।


जांच कराकर करेंगे कार्रवाई
ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशानुसार अभी नदियों में रेत खनन पूरी तरह से प्रतिबंधित है। अगर ऐसा हो रहा है तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
अभिषेक गुप्ता, एसडीएम, रामानुजगंज

Published on:
01 Jul 2021 10:25 pm
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