
बेंगलूरु. वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के एक वर्ष पूरे होने बाद राज्य में राजस्व संग्रहण में कोई खास वृद्धि नहीं हुई है। पिछले साल 1 जुलाई को लागू जीएसटी के बाद जीएसटी परिषद ने अनुमान व्यक्त किया था कि वर्ष 2015-16 के कर संग्रहण की तुलना में जीएसटी से 14 प्रतिशत की वृद्धि होगी लेकिन अनुमान के विपरीत मात्र 1 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई।
जीएसटी परिषद के अनुमानों को बड़ा झटका लगने से राज्य को जीएसटी से कोई खास फायदा होता नहीं दिख रहा है। सूत्रों के अुसार वर्ष 2016-17 के दैरान केन्द्र के मद से आने वाले केन्द्रीय उत्पाद एवं सेवा कर से करीब 49 हजार करोड़ रुपए का राजस्व संग्रहण हुआ था जबकि राज्य मद से वैट, बिक्री कर, प्रवेश कर आदि से करीब 49 हजार करोड़ रुपए राजस्व संग्रहण हुआ। इस प्रकार करीब 98 हजार करोड़ रुपए के कुल राजस्व संग्रहण में जीएसटी के अनुामनित 14 प्रतिशत वृद्धि से 1.13 लाख करोड़ का राजस्व संग्रहण होना था लेकिन यह आंकड़ा एक लाख करोड़ रूपए के करीब ही रहा। गत वित्त वर्ष के आखिरी नौ महीनों के राजस्व संग्रहण में मामूली वृद्धि से यह प्रतीत होता है कि जीएसटी से कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।
संयोग से जीएसटी के तहत अनुमानित वार्षिक 14 प्रतिशत राजस्व वृद्धि नहीं होने पर केन्द्र से राज्य को मुआवजे का प्रावधान है इसलिए राज्य को परोक्ष रूप से मदद मिलने की उम्मीद है। जीएसटी से विनिर्माण क्षेत्र में अग्रणी कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र जैसे राज्यों के हित प्रभावित होने की स्थिति में केन्द्रीय मुआवजा से उसकी भरपाई मामूली रूप से होने की संभावना है। बावजूद इसके परोक्ष रूप से ऐसे राज्यों के लिए जीएसटी राजस्व वृद्धि में अप्रभावी साबित हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती वर्ष में राजस्व संग्रहण में कमी की उम्मीद थी क्योंकि पूरे देश में एक कर-प्रणाली के तहत जीएसटी लागू किया गया। इसे लागू करने में कई प्रकार की तकनीकी और व्यावसायिक चुनौतियां आईं। पिछले एक वर्ष से राज्य के औसत राजस्व संग्रहण में 25 से 27 प्रतिशत की कमी आई जिसे हर दूसरे महीने वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा मुआवजे के माध्यम से पूरा किया जा रहा है। यानी जीएसटी से न सिर्फ अनुमानित 14 प्रतिशत के विकास दर से राज्य पिछड़ा है बल्कि राज्यों को मुआवजा भुगतान के कारण केन्द्र को भी जीएसटी से अतिरिक्त वित्तीय दबाव झेलना पड़ा है।
जीएसटी पंजीकृत प्रतिष्ठान बढ़े
आश्चर्यजनक तथ्य यह भी है कि एक ओर जीएसटी लागू होने के बाद जीएसटी के तहत पंजीकृत प्रतिष्ठानों की संख्या में वृद्धि हो गई लेकिन राजस्व संग्रहण स्थिर बना रहा। राज्य में कुल जीएसटी पंजीकृत प्रतिष्ठानों की संख्या सात लाख है जिनमें से 2.5 लाख पूरी तरह से नए सिरे से पंजीकृत प्रतिष्ठान हैं। बाजवूद इसके राजस्व संग्रहण का न बढना आश्चर्यचकित करता है।
नहीं दूर हुआ तकनीकी व्यवधान
जीएसटी लागू होने के बाद से तकनीकी व्यवधान की बाधा आज तक बरकरार है। शुरूआती समय से ही जीएसटी पंजीकरण से लेकर रिटर्न फाइल करने में कई प्रकार की परेशानियां आती रही हैं। संयोग से एक वर्ष बाद भी डीलरों को कई प्रकार की परेशानियां झेलनी पड़ रही है। यहां तक कि रिटर्न का रिफंड भी समय से नहीं आ रहा है।
अधिक सरल बनाने की जरुरत
टैक्स जानकारों को कहना है कि बीते एक साल का अनुभव बताता है कि जीएसटी को और अधिक सरल बनाने की जरुरत है। पिछले एक वर्ष में अगर जीएसटी के तहत लाखों नए कारोबारी पंजीकृत हुए है, उसके बाद भी न तो राजस्व बढा है और ना ही रिटर्न और रिफंड की बाधा दूर हुई है तो इस पर अध्ययन किया जाना चाहिए। जीएसटी में रिफंड को लेकर भी व्यापार एवं उद्योग जगत में असंतोष है और इस बारे में सरकार द्वारा बार- बार अभियान चलाने पर भी वांछित परिणाम नहीं आ पाए है।