
Karnataka Congress:कर्नाटक की राजनीति में शुक्रवार को उस वक्त हलचल बढ़ गई, जब विधान परिषद के चेयरमैन बसवराज होरट्टी ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। होरट्टी के मुताबिक, सत्तारूढ़ कांग्रेस की ओर से उन्हें पद छोड़ने के लिए कहा गया था। हालांकि, उनका कहना है कि उन्हें अब तक यह साफ तौर पर नहीं बताया गया कि आखिर उन्हें हटाने की जरूरत क्यों पड़ी।
होरट्टी ने बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री ने उनसे फोन पर बात की थी। इसके बाद उन्हें व्यक्तिगत मुलाकात के लिए बुलाया गया। बातचीत में मुख्यमंत्री ने बताया कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से उन्हें होरट्टी से इस्तीफा मांगने के लिए कहा गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि अगर वह खुद इस्तीफा नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है।
होरट्टी ने कहा कि वह टकराव की स्थिति पैदा नहीं करना चाहते। उनका कहना है कि वह सम्मान के साथ पद छोड़ना चाहते हैं और इसी वजह से उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया। उन्होंने यह भी कहा कि वह 14 अगस्त को इस्तीफा देने की योजना बना चुके थे।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम से होरट्टी काफी आहत नजर आए। उन्होंने कहा कि जब पार्टी में ही यह राय बन गई है कि उन्हें चेयरमैन के पद पर नहीं रहना चाहिए, तो ऐसे माहौल में पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं है।
होरट्टी ने कांग्रेस के इस फैसले पर सवाल भी खड़े किए। उनका कहना है कि विधान परिषद के चेयरमैन और विधानसभा के स्पीकर का चुनाव सदन की प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। किसी पार्टी का हाईकमान सीधे यह तय करे कि इन संवैधानिक पदों पर कौन बैठेगा, यह उन्हें ठीक नहीं लगता।
उन्होंने इस फैसले को असामान्य बताते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिहाज से चिंता की बात है। होरट्टी ने साफ किया कि वह इस घटनाक्रम से दुखी हैं।
दरअसल, कांग्रेस नेतृत्व की ओर से विधान परिषद के चेयरमैन पद के लिए सलीम अहमद और डिप्टी चेयरपर्सन के लिए उमाश्री के नाम को मंजूरी दिए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए जीएस पाटिल और डिप्टी स्पीकर के लिए एएस पोन्नन्ना के नाम को भी पार्टी की ओर से मंजूरी मिली है।
होरट्टी के इस्तीफे ने कर्नाटक कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संवैधानिक पदों को लेकर एक नई बहस जरूर छेड़ दी है। खास बात यह है कि होरट्टी ने खुद कहा कि मुख्यमंत्री और कुछ मंत्रियों ने व्यक्तिगत रूप से उनके प्रति सम्मान जताया, लेकिन पार्टी हाईकमान के निर्देश के कारण उन्हें पद छोड़ने को कहा गया।