16 सितंबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

विधायक की भतीजी पर बिना ड्यूटी 70 हजार रुपये वेतन लेने का आरोप, नम्मा क्लिनिक मामले में जांच

Bagalkot Namma Clinic Case: बागलकोट में नम्मा क्लिनिक की मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकिता यरगल पर नौकरी के दौरान निजी मेडिकल कॉलेज से पोस्टग्रेजुएट पढ़ाई करने और ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के बावजूद करीब 70 हजार रुपये मासिक वेतन लेने के आरोप लगे हैं। मामले की जांच जारी है और 18 सितंबर को उन्हें जिला पंचायत कार्यालय में पेश होने का निर्देश दिया गया है।
2 min read
Google source verification
Bagalkot Namma Clinic case

मेडिकल ऑफिसर अनुपस्थित रहने के बाद भी उठा रही वेतन (Photo-X @KeypadGuerilla)

Karnataka Doctor Controversy: कर्नाटक के बागलकोट जिले में बिना काम किए वेतन लेने का मामला सामने आया है। मामला नम्मा क्लिनिक में तैनात मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकिता यरगल से जुड़ा हुआ है। अंकिता यरगल विधायक उमेश मेटी की भतीजी बताई जा रही है। मेडिकल ऑफिसर पर आरोप है कि वह नौकरी के साथ पढ़ाई भी कर रही थी। इसके अलावा उसे हर महीने 70 हजार रुपये का वेतन भी मिल रहा था। फिलहाल इन आरोपों की जांच की जा रही है।

सीईओ ने जांच के लिए उपस्थित रहने के दिए निर्देश

बागलकोट जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) गजानन बाले ने मामले में जांच के लिए डॉ. यरगल को उपस्थित होने का निर्देश दिया था। हालांकि, वह पिछली जांच में उपस्थित नहीं हुईं। इसके बाद CEO ने उन्हें दोबारा नोटिस जारी कर 18 सितंबर को सुबह 10 बजे जिला पंचायत कार्यालय के कमरा नंबर 11 में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

मार्च से क्लिनिक में अनुपस्थित रहने का आरोप

CEO द्वारा जारी नोटिस के मुताबिक, मेडिकल ऑफिसर पर आरोप है कि वह  3 मार्च से सितंबर तक बागलकोट के वांबे कॉलोनी स्थित नम्मा क्लिनिक से अनुपस्थित रहीं। अधिकारियों का कहना है कि इस अवधि में क्लिनिक में मेडिकल ऑफिसर उपलब्ध नहीं रहने से मरीजों और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि डॉ. यरगल इसी अवधि में एक निजी मेडिकल कॉलेज में पोस्टग्रेजुएट मेडिकल की पढ़ाई कर रही थीं और नम्मा क्लिनिक में मेडिकल ऑफिसर के तौर पर मिलने वाला वेतन भी प्राप्त कर रही थीं।

नियमों के उल्लंघन की जांच

अधिकारियों के मुताबिक, मामले को सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत पंजीकृत चिकित्सकों से जुड़े नियमों के संभावित उल्लंघन के तौर पर गंभीरता से लिया जा रहा है। नोटिस में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की पेशेवर आचार संहिता के संभावित उल्लंघन का भी उल्लेख किया गया है।

यदि आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो डॉ. यरगल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। मामले को कर्नाटक मेडिकल काउंसिल और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के समक्ष भी भेजे जाने की बात नोटिस में कही गई है।

वेतन की वसूली की भी चेतावनी

अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि कथित अनधिकृत दोहरी नियुक्ति की अवधि में उन्हें भुगतान किए गए वेतन की पूरी राशि लागू नियमों के तहत वापस वसूल की जा सकती है। नोटिस के अनुसार, SN मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने डॉ. यरगल को पढ़ाई के लिए अनुमति दी थी। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि अनुमति मिलने के बावजूद वह नम्मा क्लिनिक में अपनी निर्धारित ड्यूटी से अनुपस्थित रहीं।

अगली सुनवाई में भी अनुपस्थित रहने पर एकतरफा फैसला

CEO ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि डॉ. यरगल 18 सितंबर को निर्धारित जांच में उपस्थित नहीं होती हैं, तो उनके खिलाफ एकतरफा निर्णय लिया जा सकता है। इसी बीच, जिला स्वास्थ्य अधिकारी राजकुमार यरगल द्वारा डॉ. अंकिता यरगल को ड्यूटी से हटा दिए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

बड़ी खबरें

View All

राष्ट्रीय

ट्रेंडिंग