मुफ्त बस पास योजना से भी बढ़ेगा बोझ
बेंगलूरु. राज्य में डीजल और पेट्रोल में लगाए गए दो फीसदी उपकर का असर अब दिखने लगा है। डीजल महंगा हो जाने के कारण वित्तीय घाटा झेल रहे राज्य के चारों सरकारी परिवहन निगमों ने एक बार फिर से सरकार के पास किराया वृद्धि का प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया है। सरकार ने इस बार किराए में वृद्धि करने के संकेत दिए हैं।
परिवहन मंत्री डी सी तमण्णा ने बुधवार को कहा कि परिहवन निगमों के किराया वृद्धि संबंधी प्रस्ताव सरकार के पास आया है। इस पर सभी पक्षों के साथ विचार-विमर्श के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा। हालांकि, पिछले दो महीने के दौरान तमण्णा का विभाग दो बार बस किराए मेें वृद्धि के प्रस्ताव को खारिज कर चुका है। हालांकि, पिछले महीने ही बेंगलूरु महानगर परिवहन निगम (बीएमटीसी) ने 1 जनवरी से वातानुकूलित बसों के किराए में की गई कटौती को वापस ले लिया था।
राज्य के चार सरकारी परिवहन निगमों- कर्नाटक राज्य परिवहन निगम (केएसआरटीसी), उत्तर-पश्चिम कर्नाटक सड़क परिवहन निगम (एनडब्लूकेआरटीसी), उत्तर-पूर्व कर्नाटक सड़क परिवहन निगम (एनइकेआरटीसी) और बीएमटीसी घाटे में चल रहे हैं।
परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक चारों निगम 600 करोड़ रुपए के घाटे में चल रहे हैं। निगमों ने किराए में करीब 20 फीसदी वृद्धि का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। पिछले महीने मंत्री ने कहा था कि किराया बढ़ाने के बजाय खर्च घटाने और राजस्व बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव बी. बसवराज ने बुधवार को चारों निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की।
उन्होंने कहा कि निगमों ने सरकार के पास नए सिरे से किराए में वृद्धि के लिए प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया है। उन्होंंने कहा कि पहले भी दो बार को किराए में वृद्धि के लिए सिफारिश की गई थी। उन्होंने कहा कि नए उपकर के बाद डीजल करीब 1.30 प्रति लीटर महंगा हो गया है जिसके कारण चारों निगमों को परिचालन घाटा उठाना पड़ रहा है।
तीनों राज्य परिवहन निगमों में रोजाना 6 लाख डीजल की खपत होती है और अब हर महीने 2 से 2.50 करोड़ का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ेगा जबकि बीएमटीसी पर करीब एक करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसके अलावा रख-रखाव खर्च और कर्मचारियों के वेतन-भत्ते में वृद्धि के कारण भी निगमों पर वित्तीय बोझ बढ़ा है। उन्होंने कहा कि आखिरी बार 2014 में बस किराए में वृद्धि हुई थी।
एक परिवहन निगम के अधिकारी ने कहा कि परिचालन लागत का लगभग 40 फीसदी हिस्सा ईंधन पर आता है। परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बसों के किराए में 15 फीसदी तक वृद्धि पर निर्णय अगले सप्ताह तक हो सकता है। परिहवन विभाग के अधिकारियों के कहना है कि पड़ोसी राज्यों में पिछले चार साल के दौरान कई बार बस किराए में वृद्धि हो चुकी है।