बैंगलोर

किसानों के दरवाजे पहुंचाएंगे ऋण-माफी पत्र: कुमारस्वामी

यह योजना 1 अप्रेल 2009 से दिसम्बर 2017 तक उठाए गए ऋण के लिए प्रभावी होगी

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किसानों के दरवाजे पहुंचाएंगे ऋण-माफी पत्र: कुमारस्वामी

राहुल गांधी से मिलेंगे मुख्यमंत्री
[typography_font:14pt;" >लोगों की दुआ, राहुल के चलते बना सीएम: कुमारस्वामी


बेंगलूरु. किसानों की कर्ज माफी पर ठोस निर्णय के लिए राज्य के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और उपमुख्यमंत्री जी.परमेश्वर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से भी मिलेंगे। यहां किसानों के साथ बैठक के बाद कुमारस्वामी ने फिर एक बार दोहराया कि वे लोगों की दुआ और राहुल गांधी के आशीर्वाद से ही सत्ता में आए हैं और कांग्रेस की स्वीकृति से ही इस मुद्दे पर अंतिम फैसला करेंगे।

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लेकिन, उन्होंने जोर देकर कहा कि वे किसानों की कर्जमाफी का प्रमाणपत्र उनके दरवाजे तक पहुंचाएंगे। वहीं उपमुख्यमंत्री डा. जी. परमेश्वर ने कांग्रेस का रूख स्पष्ट करते हुए कहा कि पार्टी ऋण माफ करने के खिलाफ नहीं है। किसानों की बात सुनने के बाद कुमारस्वामी ने पत्रकारों से बातची करते हुए कहा कि राहुल गांधी एक दो दिनों में अमरीका से लौटने वाले हैं। उनके आने के बाद वे उपमुख्यमंत्री जी.परमेश्वर के साथ उनसे मिलेंगे और किसानों की कर्जमाफी योजना पर आम सहमति से निर्णय करेंगे।

राहुल गांधी ने राज्य का दौरा करते समय अपने भाषणों में किसानों की कर्जमाफी का जिक्र भी किया। अब यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसानों के दरवाजे तक ऋण माफी का प्रमाण पत्र पहुंचाए। किसानों का ऋण चाहे कितने भी हजार करोड़ का होगा सरकार उन्हें बचाने के लिए कदम उठाएगी। गौरतलब है कि राष्ट्रीयकृत बैंकों और सहकारी बैंकों को मिलाकर किसानों का लगभग 53 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे कुमारस्वामी ने कहा कि उनकी सरकार निष्क्रीय नहीं बैठेगी। उनकी सरकार के पास सिद्धरामय्या का 16 बजट पेश करने का अनुभव है और वे उनसे भी राय लेंगे।

उनकी सरकार के पास महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पंजाब या आंध्रप्रदेश जैसे एक से डेढ़ लाख रुपए की ऋण माफी की सीमा नहीं है। उनकी सरकार किसानों का जो भी कर्ज है उसे माफ करेगी। यह योजना 1 अप्रेल 2009 से दिसम्बर 2017 तक उठाए गए ऋण के लिए प्रभावी होगी। मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार के सम्पूर्ण कृषि ऋण माफ करने के बाद यह योजना लागू की जाएगी।

पहले चरण में सिर्फ लघु एवं सीमांत किसानों के फसल ऋण माफ किए जाएंगे। दूसरे चरण में सरकार अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों से गैर-शहरी क्षेत्रों में दिए गए ऋण पर गौर करेगी। हर जिले में नियुक्त किए गए नोडल अधिकारी लाभार्थी किसानों का विस्तृत ब्यौरा तैयार करेंगे जिसके बाद ऋण माफी की जाएगी। ऋण लेने वाले किसान को संपूर्ण ब्यौरा 15 दिनों में नोडल अधिकारी को सौंपना होगा। वे चाहते हैं कि इस ऋण माफी योजना का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे ना कि बिचौलिए उसका लाभ उठा लें।

इसमें कोई राजनीति नहीं होगी। वे उपमुख्यमंत्री जी.परमेश्वर के साथ अगले दो-तीन दिनों में राष्ट्रीयकृत बैंकों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। बैंकों के महाप्रबंधकों और अध्यक्षों के साथ बैठक में मूल राशि पर ब्याज छोडऩे की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। वहीं एकमुश्त निपटान योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से ऋणों के पुनर्भुगतान की संभावनाओं पर भी बात होगी।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों से पूछा कि क्या कृषि ऋण लेकर उसका दुरुपयोग करते हुए व्यापार करने वालों का ऋण माफ किया जाना चाहिए? क्या उनका भी ऋण माफ किया जाना चाहिए जो पिछले तीन वर्षों से हर साल 4 लाख रुपए आयकर दे रहे हैं। क्या इसमें राजनीतिज्ञों, विधायकों, विधान परिषद के सदस्यों, सांसदों, सहकारी बैंक कर्मियों को भी शामिल किया जाए जिन्होंने ऋण उठाया है।

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Published on:
31 May 2018 04:43 pm
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