हिज्जनहल्ली और येसलूर के ग्रामीण घर ढहने की आशंका से पहले ही गांव छोड़ चुके हैं
बेंगलूरु. इस बीच, चिक्कमगलूरु और हासन जिले में सोमवार को भी बारिश हुई और कई जगहों पर भूस्खलन भी हुआ। सकलेशपुर में कई इलाके बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। हिज्जनहल्ली और येसलूर के ग्रामीण घर ढहने की आशंका से पहले ही गांव छोड़ चुके हैं। यहां सैकड़ों एकड़ फसल पूरी तरह बाढ़ के पानी में डूब गई है। दोनों जिलों में कॉफी और केला की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। लगभग 10 हजार 600 हेक्टेयर रकबे में धान की खेती हुई थी जिसमें से 6 हजार हेक्टेयर बाढ़ के पानी में डूब चुका है।
हिज्जनहल्ली के पास एक राहत शिविर स्थापित किया गया है जहां 100 लोग हैं। उन्हें शिविर में भोजन तथा अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। कल्लाहल्ली और मागेरी के बीच की सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई है। सड़क पर लगभग 300 मीटर लंबी दरार बन गई है। इस तालुक के अधिकांश सड़कों की हालात लगभग ऐसी ही है। अलुवल्ली और कद्राहल्ली के बीच 23 करोड़ की लागत से निर्मित 11 किमी लंबी कंक्रीट की सड़क में बड़े-बड़े कई गड्ढे बन गए हैं।
दो खाद्य संस्थानों से तैयार भोजन की आपूर्ति
देश के दो शीर्ष खाद्य संस्थान रक्षा खाद्य अनुसंधान प्रयोगशाला (डीएफआरएल) और केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) बाढ़ प्रभावित केरल और कोडुगू में तैयार भोजन की आपूर्ति कर रहे हैं। डीएफआरएल ने तीन टन खाद्य सामग्री (टोमैटो राइस, उपमा आदि) के साथ पानी के पैकेट भी वायुसेना के जहाज से तिरुवनंतपुरम रवाना किया और अब दूसरी खेप भेजने की तैयारी में है। एफटीआरआई के अधिकारियों के मुताबिक उपमा, इमली पोहा, चपाती आदि भेजे जा रहे हैं जिसे गर्म कर खाया जा सकता है। इसके अलावा आचार और जैम भी खाने के साथ भेजे जा रहे हैं। संस्थान हाई-प्रोटीन बिस्किट और रस्क बिस्टिक भी भेजने की तैयारी कर रहा है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों से फीडबैक मिलने के बाद वे कुछ और चीजें इसमें जोड़ेंगे। सीएफटीआरई के प्रभारी निदेशक सुब्रमण्यम ने बताया कि तीन हजार तैयार खाना कोच्चि के लिए, 6 हजार तैयार खाना कोडुगू के लिए और 5 हजार 500 तैयार खाना केरल के वायनाड़ के लिए रवाना किया जा चुका है। अगले तीन से चार दिनों में संस्थान 50 हजार खाना तैयार करेगा। अभी राहत एवं बचाव कार्य अगले तीन से चार दिनों तक चलेंगे उसके बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी। खाद्य सामग्री सीएफटीआरआई के प्रमाणित तकनीकों के आधार पर तैयार किए जा रहे हैं।