
मेंगलूरु. फाल्गुनी नदी पर 25 जून को पुल धंसने की घटना के बाद बुधवार को राष्ट्रीय राजमार्ग मंडल (एनएचडी) और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने 93 वर्ष पुराने गुरूपुरा पुल का तकनीकी निरीक्षण किया। पुलों के निरीक्षण के लिए विशेष उपकरणों से युक्त वाहन की मदद से विशेषज्ञ दल ने नौ दशक से ज्यादा पुराने पुल के निचले हिस्से और डेक का निरीक्षण किया।
सुबह छह बजे से दस बजे के बीच चले निरीक्षण कार्य के कारण वमनजूर-कवूर-बाजपे और कइकम्बा के रास्ते वाहनों की आवाजाही की गई। एनएचडी के अधिकारियों ने पुल के कोर डेक स्लैब के नमूने एकत्र किए जिसे परीक्षण के लिए बेंगलूरु प्रयोगशाला भेजा गया है। करीब चार दिनों के बाद आने वाली रिपोर्ट के आधार पर पुल की स्थिति का पता चलेगा।
स्थानीय लोगों द्वारा नदियों में अवैध रेत उत्खनन के कारण इस क्षेत्र के पुलों का आधार कमजोर होने की शिकायत की गई है। पिछले दिनों फाल्गुनी नदी पर पुल घंसने का मूल कारण अवैध रेत उत्खनन बताया जा रहा है।
कबिनी क्षेत्र में बाढ़ की चेतावनी
कावेरी जलाधिग्रहण क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कृष्णराज सागर बांध (केआरएस) का जलस्तर गुरुवार को 105.63 फीट पर पहुंच गया जबकि केआरएस का अधिकतम जलस्तर 124.80 फीट है। पिछले करीब एक दशक में यह पहला मौका है जब जून महीने में केआरएस का जलस्तर 105 फीट के पार पहुंचा है।
अधिकारियों ने बताया कि केआरएस में पानी का अंतर्वाह 3995 क्यूसेक रिकॉर्ड किया गया लेकिन मलनाड क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश के कारण अगले दो दिनों में पानी का अंतर्वाह कई गुणा ज्यादा बढ़ सकता है जिससे जलस्तर में रिकॉर्ड वृद्धि होने की संभावना है।
वहीं कबिनी में पानी का अंतर्वाह 12000 क्यूसेक से बढ़कर 15000 क्यूसेक पहुंचने के कारण एक ही महीने में दूसरी बार प्रशासन ने बाढ की चेतावनी जारी की है। एचडी कोटे स्थित कबिनी का जलस्तर गुरुवार को 2282.35 फीट पहुंच गया जबकि इसकी अधिकतम क्षमता 2284 फीट है।