बैंगलोर

कन्नड़ राज्योत्सव : पुरस्कार सिर्फ 63, दावेदार 200 से ज्यादा

सरकार राज्य के सर्वोच्च नागरिक सम्मान राज्योत्सव पुरस्कर के लिए नामों को अंतिम रुप नहीं दे पाई है।

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कन्नड़ राज्योत्सव : पुरस्कार सिर्फ 63, दावेदार 200 से ज्यादा

बेंगलूरु. राज्य की स्थापना के उपलक्ष्य में एक नवंबर को आयोजित होने वाले कन्नड़ राज्योत्सव में सिर्फ पांच दिन बाकी रह गए हैं लेकिन सरकार अब भी सरकार अब भी राज्य के सर्वोच्च नागरिक सम्मान राज्योत्सव पुरस्कर के लिए नामों को अंतिम रुप नहीं दे पाई है।

राज्य के 63 वें स्थापना दिवस के कारण इस साल विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए 63 व्यक्तियों और संस्थाओं को पुरस्कार दिया जाना है लेकिन कन्नड़ व संस्कृति विभाग को 200 से ज्यादा आवेदन मिले हैं। पुरस्कार के लिए लॉबिंग का सिलसिला अब भी जारी है। राज्योत्सव पुरस्कार पाने के आकांक्षी अब भी सत्तारुढ़ गठबंधन के नेताओं के सिफारिशी पत्र लेकर विभाग के कार्यालय में पहुंच रहे हैं।

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उधर, विभागीय सूत्रों का कहना है कि पुरस्कार चयन के लिए गठित आठ सदस्यीय समिति ने करीब 130 नामों की सूची मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी है। अब इस पर मुख्यमंत्री अंतिम निर्णय लेंगे। विभाग के सूत्रों का कहना है कि अंतिम क्षणों में कुछ नाम बदल भी सकते हैं।

वर्ष 2016 से पहले तक राज्योत्सव पुरस्कारों की संख्या निश्चित नहीं थी लेकिन पुरस्कार के लिए चयन मानकों को लेकर दायर याचिका पर कर्नाटक उच्च न्यायालय की टिप्पणी के बाद विभाग ने पुरस्कार के मानक तय करने के लिए एक समिति बनाई थी। इस समिति ने सुझाव दिया था कि राज्य की स्थापना की वर्षगांठ के समान संख्या में ही हर साल पुरस्कार दिया जाना चाहिए।

कन्नड़ व संस्कृति मंत्री जयमाला ने पिछले सप्ताह कहा था कि इस साल सिर्फ 63 राज्योत्सव पुरस्कार दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि खिलाडिय़ों को छोड़कर अन्य कोई व्यक्ति 60 साल की आयु होने पर ही इस पुरस्कार के लिए पात्र माना जाएगा। जयमाला ने कहा था कि इस नियम के बाद उन लोगों से काफी संख्या में पुरस्कार के लिए आवेदन मिले, जो हाल-फिलहाल में 60 वर्ष के हुए हैं।

जयमाला ने कहा कि विभाग की प्राथमिकता 70-80 वर्ष आयु के आवेदकों को पुरस्कार देने की है। जयमाला ने कहा कि पुरस्कार के लिए चयन में क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की भी कोशिश होगी। हालांकि, जयमाला ने भी स्वीकार किया कि पुरस्कार के आकांक्षी लोग अपना नाम जुड़वाने के लिए काफी दबाव डाल रहे हैं।

विभाग के अंतर्गत शामिल विभिन्न अकादमियों को विभाग की ओर से इस पुरस्कार के लिए 5 से 7 नाम भेजने के लिए निर्देश जारी हुए हैं। लेकिन यक्षगान अकादमी को ऐसा निर्देश नहीं मिलने पर राज्य के यक्षगान कलाकारों ने कन्नड़ संस्कृति विभाग से नाराजगी जताई है।

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Published on:
27 Oct 2018 07:45 pm
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