बैंगलोर

कर्नाटक कांग्रेस में बढ़ा बवाल, तीन दर्जन विधायक होंगे दिल्ली रवाना, कहा यह करो या मरो की स्थिति

Karnataka Congress: कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के भीतर मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर असंतोष बढ़ता दिख रहा है। करीब 35 विधायक दिल्ली जाकर हाईकमान पर दबाव बनाने की तैयारी में हैं। विधायकों ने साफ कहा है कि अगर 15 दिनों के भीतर कैबिनेट विस्तार और नए चेहरों को मौका नहीं मिला, तो वे बड़ा कदम उठा सकते हैं। साथ ही डी.के. शिवकुमार समर्थकों की ओर से नेतृत्व परिवर्तन की मांग भी तेज हो गई है।
3 min read
May 23, 2026
Karnataka Congress
कर्नाटक कांग्रेस के विधायक जाएंगे दिल्ली (फोटो- एएनआई)

Karnataka Congress: कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही है। राज्य में मंत्रिमंडल फेरबदल की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इसी मांग को लेकर पार्टी के करीब तीन दर्जन विधायक फिर एक बार दिल्ली में डेरा डालने की तैयारी कर रहे हैं। पिछले महीने ही दो दर्जन से अधिक विधायक कैबिनेट फेरबदल की मांग को लेकर दिल्ली में कई दिनों तक डेरा डाले थे। इस बार विधायकों का कहना है कि यह उनके लिए अंतिम मौका है। यह उनके लिए करो या मरो की स्थिति है।

मांगे पूरी नहीं हुई तो उठाएंगे बड़ा कदम - विधायक

शिवमोग्गा में शुक्रवार को संवाददाताओं से बात करते हुए विधायक बेलूर गोपालकृष्णा ने कहा कि पार्टी के कम से कम 30-35 विधायक 28 या 29 मई तक राष्ट्रीय राजधानी जाएंगे। वे पार्टी नेतृत्व पर कैबिनेट में फेरबदल करने का दबाव डालेंगे, ताकि उनमें से करीब 20 विधायकों को मंत्री बनने का मौका मिल सके। वे इस बात पर जोर देंगे कि यह फेरबदल 15 दिनों के भीतर हो जाए क्योंकि सरकार को सत्ता में आए तीन साल पूरे हो चुके हैं। अगर मंत्रिमंडल में बदलाव नहीं हुआ और कैबिनेट में नए चेहरों को शामिल नहीं किया गया, तो वे कोई कड़ा कदम उठा सकते हैं।

करो या मरो जैसी स्थिति - विधायक

गोपालकृष्णा ने आगे कहा कि पहले यह तय हुआ था कि केरल के मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद विधायक दिल्ली जाएंगे। अब जब मुख्यमंत्री चुन लिए गए हैं, तो दो-तीन दिनों में सभी आपस में मिलेंगे और करीब 30-35 विधायक दिल्ली जाएंगे। इस बार उनके लिए करो या मरो जैसी स्थिति है क्योंकि सरकार को सत्ता संभाले तीन साल हो चुके हैं। अभी भी कोई कैबिनेट में फेरबदल की बात नहीं कर रहा है। बता दें कि मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने हाल ही में कहा था कि कैबिनेट में फेरबदल होगा और 15 नए लोगों को शामिल किया जाएगा। सभी ने अनुरोध किया है कि 20 लोगों को शामिल किया जाए, क्योंकि जो लोग अभी मंत्री हैं, वे तीन साल तक सत्ता का सुख भोग चुके हैं। इसलिए संभवत: 28 या 29 मई तक दिल्ली जाने का फैसला किया है।

35 विधायक जाएंगे दिल्ली

इससे पहले भी 25 विधायक दिल्ली गए थे और अब यह संख्या बढ़ गई है। इस बार 35 विधायकों के दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनकी मुख्य मांग कैबिनेट में फेरबदल की है। मौजूदा मंत्रियों को बदला जाना चाहिए और नए लोगों को मौका दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ऐसा कोई नियम नहीं है कि वही लोग मंत्री बने रहें। उन्हें तीन साल का समय दिया गया है। जब सरकार ने अपना आधा कार्यकाल पूरा कर लिया था, तब उन्हें मंत्री के तौर पर छह महीने का अतिरिक्त समय दिया गया था। राज्य में कांग्रेस पार्टी को मजबूत बनाए रखने के लिए कैबिनेट में फेरबदल का फैसला लेना ही होगा।

मुख्यमंत्री बदलने के सवाल पर नहीं दिया जवाब

नेतृत्व में परिवर्तन से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी हाई कमान को फैसला करना है। वे सभी अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री बदलने के विषय में कोई भी सवाल पार्टी नेतृत्व से पूछा जाना चाहिए। उनकी मांग सिर्फ यह है कि मंत्रिमंडल में फेरबदल करके उन्हें मंत्री पद दिया जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है, तो आने वाले दिनों में कड़े फैसले लेने होंगे। इसे ऐसे ही चलने नहीं देंगे। हमें 15 दिनों के भीतर मौका दिया जाना चाहिए। अगर नहीं, तो हमारे पास दूसरी योजनाएं हैं। हम उन पर फैसला लेंगे।

मंत्रिमंडल में 3 पद खाली, मगर फैसला आसान नहीं

दरअसल, राज्य मंत्रिमंडल में तीन पद खाली हैं। बी. नागेंद्र ने कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि विकास विकास निगम में कथित गबन के आरोपों के चलते इस्तीफा दे दिया था, जबकि के. एन. राजण्णा को पार्टी हाई कमान के निर्देश पर बर्खास्त कर दिया गया था। मंत्री डी. सुधाकर के हाल ही में हुए निधन से तीसरा पद खाली हो गया है। सरकार में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 34 मंत्री हो सकते हैं। हालांकि, पार्टी हाईकमान के लिए यह फैसला आसान नहीं है।

राज्य में नेतृत्व परिवर्तन संभवत: नहीं होगा

कैबिनेट फेरबदल के साथ उप मुख्यमंत्री व प्रदेश अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार के समर्थक नेतृत्व परिवर्तन की मांग भी कर रहे हैं। अगर पार्टी हाईकमान केवल कैबिनेट फेरबदल का ही फैसला करता है, तो यह इस बात का संकेत होगा कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन संभवत: नहीं होगा। कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से पार्टी के भीतर नेतृत्व के मुद्दे पर खींचतान चल रही है। यह भी दावा किया जाता है कि कांग्रेस हाईकमान सरकार गठन के समय सत्ता में साझेदारी के फार्मूले पर सहमत हुआ था, जिसके तहत सिद्धरामय्या और शिवकुमार को ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री का पद संभालना था। अब शिवकुमार समर्थक विधायक अपने नेता के लिए मुख्यमंत्री पद की मांग कर रहे हैं, वहीं सिद्धरामय्या समर्थक नेता केवल कैबिनेट में फेरबदल चाहते हैं।

Updated on:
23 May 2026 11:08 am
Published on:
23 May 2026 11:07 am