इस दौरान 10 नेता जिला प्रभारी मंत्री रहे लेकिन यह मिथक नहीं टूट पाया
बेंगलूरु. राज्य का एक जिला ऐसा है जिसके प्रभारी मंत्री रहे नेता पिछले दो दशकों में चुनाव नहीं जीत पाए। कोप्पल जिले वर्ष 1997 में रायचूर जिले के विभाजन के साथ अस्तित्व में आया था। पिछले 20 साल के दौरान हुए विधानसभा चुनावों मेें कभी भी जिला प्रभारी मंत्री चुनाव नहीं जीत पाए। इस दौरान 10 नेता जिला प्रभारी मंत्री रहे लेकिन यह मिथक नहीं टूट पाया।
जे एच पटेल की सरकार के समय 1997 में नागप्पा सालोणी इस जिले के प्रभारी मंत्री बनाए गए लेकिन 1999 में हुए विधानसभा चुनाव में वे कनकगिरी से हार गए। उनके बाद कनकगिरी क्षेत्र से ही जीते एम. मल्लिकार्जुन को एस एम कृष्णा सरकार के दौर में जिला प्रभारी मंत्री बनाया गया लेकिन वर्ष 2004 में वे इसी क्षेत्र से चुनाव हार गए। 2004 में गंगावती से निर्वाचित जनता दल (ध) के विधायक इकबाल अंसारी धरम सिंह व एच डी कुमारस्वामी की गठबंधन सरकार में जिला प्रभारी मंत्री बने लेकिन 2008 के चुनाव में उनकी हार हो गई।
बी.एस. येड्डियूरप्पा के नेतृत्व में वर्ष 2008 में बनी भाजपा सरकार में जिले के किसी भी विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया था। इस दौरान कनकगिरी से निर्वाचित शिवराज तंगडग़ी को मंत्री बनाया लेकिन उन्हें जिला प्रभारी मंत्री नहीं बनाया गया। भाजपा सरकार के 5 वर्षीय कार्यकाल के दौरान प्रति वर्ष जिले के लिए अलग-अलग 5 जिला प्रभारी मंत्री बनाए गए। पहले गोविंद कारजोल, फिर के. शिवनगौड़ा नायक, 2011-12 में शिवराज तंगडग़ी उसके पश्चात मंत्री लक्ष्मण सवदी को जिला प्रभारी मंत्री का दायित्व सौंपा गया था। विधानसभा में मोबाइल फोन पर अश्लील क्लिप देखने के मामले सवदी को मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा था। इसके बाद वर्ष 2012 में मुरगेश निराणी को जिला प्रभारी मंत्री बनाया गया। साल भर बाद 2013 में निराणी बेलगी क्षेत्र से चुनाव हार गए।
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सिर्फ कांग्रेस नेताओं के परिजनों को टिकट!
बेंगलूरु. रिश्तेदारों के लिए अधिक टिकट की मांग को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने सिर्फ तीन वरिष्ठ नेताओं के संतानों को ही टिकट देने का फैसला किया है। सूत्रों ेके मुताबिक इनमें मुख्यमंत्री के बेटे और मंत्री रामलिंगा रेड्डी और सांसद के एच मुनियप्पा की बेटी का नाम शामिल हैं।