विकास सौधा स्थित अपने कार्यालय कक्ष में जब महेश यह बात कह रहे थे तब सिद्धार्थ भी उनके बगल में बैठे थे
बेंगलूरु. बसपा के इकलौते मंत्री एन महेश क अचानक कुमारस्वामी मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने को लेकर कयासों का दौर जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के प्रस्तावित गठबंधन से अलग होने के बाद बसपा ने रणनीति के तहत गठबंधन सरकार से अलग होने का फैसला लिया है। बसपा की नजर दलित मतदाताओं पर है और वह बाकी राज्यों की तरह यहां भी खुद को कांग्रेस से अलग दिखाकर राजनीतिक जमीन मजबूत करने की तैयारी कर रही है।
महेश ने त्याग-पत्र देने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में दावा किया मंत्रिमंडल छोडऩे का फैसला उनका अपना है। पार्टी ने उन्हें पद छोडऩे के लिए नहीं कहा था। महेश ने कहा कि उन्होंने प्रदेश प्रभारी व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ को भी नहीं दी थी। हालांकि, विकास सौधा स्थित अपने कार्यालय कक्ष में जब महेश यह बात कह रहे थे तब सिद्धार्थ भी उनके बगल में बैठे थे।
महेश के बयान का समर्थन करते हुए सिद्धार्थ ने कि महेश ने अपने इस्तीफे के बारे में उन्हें भी नहीं बताया था। सिद्धार्थ ने कहा कि उनका इस वक्त यहां मौजूद होना महज संयोग है। सिद्धार्थ ने कहा कि वे प्रदेश प्रभारी हैं और संगठन को मजबूत करने व लोकसभा चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में वे यहां आए थे। अगले कुछ महीने तक अन्य राज्यों में चुनाव होने के कारण वे यहां नही आ पाएंगे।
महेश ने अपने इस्तीफे के पीछे राजनीतिक कारणों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी और आंदोलन मेरे लिए पद से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। जब मंत्री बना था तब नहीं पता था कि सरकारी कामकाज निपटाने में इतनी व्यस्तता हो जाती है कि अपने क्षेत्र के लिए भी समय नहीं निकल पाता है। कामकाज में व्यस्तता के कारण क्षेत्र में कम समय दे पा रहा था। महेश ने कहा कि वे पद छोडऩे के अपने फैसले पर कायम हैं और मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी के कहने पर भी उसे वापस नहीं लेंगे। अगर महेश का इस्तीफा स्वीकार हो जाता है तो मंत्रिमंडल में रिक्त पदों की संख्या बढ़कर ८ हो जाएगी।