
उन्होंने बताया कि जो दूसरे गुरुओं के प्रति नफत की भावना फैलाये, वे दुर्गति को प्राप्त करेंगे
मैसूरु. स्थानकवासी जैन संघ के तत्वावधान में सिटी स्थानक में संत डॉ समकित मुनि ने सोमवार को प्रवचन देते हुए कहा कि जो गो माता की सेवा करता है, वह कभी आर्थिक रूप से दुखी नहीं होता है। गो माता, दीन दुखियों एवं स्वधर्मी बंधुओं की सेवा अनुपम एवं अनुकरणीय सेवा है। रूपमुनि ने मानव सेवा एवं जीव दया के क्षेत्र में दान पुण्य की खूब प्रभावना करते हुए अनेक गोशाला एवं बकराशाला खुलवाए।
वरिष्ठ प्रवर्तक रूपमुनि के देवलोकगमन पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए डॉ समकितमुनि ने बताया कि उनका यह सूत्र कि गुरु एक और सेवा अनेक समयानुसार सटीक तथा मैत्री एवं सहृदयता का द्योतक है। यह सूत्र सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारा, संयमी जीवन में सहयोग में अहम भूमिका निभाता है। वे सदैव अपने अनुयायियों को यही प्रेरणा देते रहे कि आपके गुरु कोई भी हो, आप उन्हीं गुरु के शिष्य होते हुए, उन्हीं की आज्ञा में रहते हुए सभी गुरुओं की सेवा करते रहो, जिससे तुम्हें अपार पुण्य का अर्जन भी होगा और सर्व प्रकार की सुख सुविधाएं और गुरुजनों के आशीर्वाद सतत प्राप्त होते रहेंगे।
उन्होंने बताया कि जो दूसरे गुरुओं के प्रति नफत की भावना फैलाये, वे दुर्गति को प्राप्त करेंगे। हमें दुर्गति नहीं, बल्कि गुरुजनों की सेवा करते करते सद्गति प्राप्त करना है। प्रारम्भ में जयवंतमुनि ने गीतिका प्रस्तुत की। भवांतमुनि ने उपवास के प्रत्याख्यानों का जानकारी दी। संघ अध्यक्ष कैलाशचंद बोहरा, मंत्री सुशील कुमार नंदावत, तेजराज नंगावत, सोहनलाल बाघमार, बुद्धमल मूथा, बुद्धमल बाघमार, उषा गांधी ने भी विचार व्यक्त किए।
सुख का अतिरेक ही दुख का कारण
बेंगलूरु. राम सेवा समिति के तत्वावधान में आई माता मंदिर में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव में पंडित पवन महाराज ने कहा कि सुख का अतिरिक्त ही दुख का कारण बनता है। इसी सुख के कारण राम को वनवास जाना पड़ा।