
बेंगलूरु. पर्यटन गतिविधियों को बढावा देने के मकसद से नंदी हिल्स पर केबल कार सुविधा को विकसित करने की प्रस्तावित योजना अब ठंडे बस्ते में चली गई है और इसे नए सिरे से क्रियान्वित करने पर विचार किया जा रहा है। पर्यटन विभाग का कहना है कि परियोजा के क्रियान्वयन में वन भूमि की बाधा आ रही है जिस कारण हम अब इसे नए सिरे से लागू करने पर विचार करेंगे।
परियोजना के लिए जब विस्तृत अध्ययन किया गया तब पाया गया कि केबल कार के लिए वन भूमि की जरुरत पड़ेगी जिसमें कई प्रकार की कानूनी अड़चनें आएंगी। वहीं सरकार ने केबल कार परियोजना को कैसे बंद कर सकते हैं यह निर्धारित करने के लिए व्यवहार्यता अध्ययन शुरू करने का निर्णय लिया है। सरकार के प्रतिनिधियों की ओर से कहा गया है कि हम व्यवहार्यता अध्ययन के लिए ढांचागत विकास निगम (आईडेक) से चर्चा कर रहे हैं, जो हमें नंदी हिल्स में वन भूमि की सटीक सीमा बताएगा।
बेंगलूरु से करीब ६० किमी की दूरी पर स्थित नंदी हिल्स एक ऐतिहासिक स्थल है जो बेंगलूरुवासियों के लिए पिकनिक मनाने के पसंदीदा स्थानों में से एक है। नंदी हिल्स पर नियमित रूप से बढ़ती पर्यटन गतिविधियों को देखते हुए वर्ष २०१५-१६ के राज्य बजट में यहां केबल कार स्थापित करने की घोषणा की गई थी। नंदी हिल्स पर मौजूद ९वीं शताब्दी के भोग नंदीश्वर मंदिर, एक १५ फीट ऊंची नंदी प्रतिमा, सर एम. विश्वेशवरैया की समाधि और संग्रहालय तथा टीपू सुल्तान का ग्रीष्मकालीन किला पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केन्द्र रहता है। साथ ही यहां का प्राकृतिक वातावरण और मनोरम दृश्य पर्यटकों को पूरे वर्ष आकर्षित करता है।
व्यवहार्यता अध्ययन में नंदी हिल्स के अतिरिक्त तुमकूरु जिले के मधुगिरि मोनोलिथि पहाड़ी और मंड्या तथा चामराजनगर जिले के गगनचुक्की और भरचुक्की जलप्रपात पर प्रस्तावित केबल कार परियोजना को भी शामिल किया गया है। इन सभी पर्यटन स्थलों पर केबल कार को लेकर सितम्बर में एक रिपोर्ट आ जाएगी। वन भूमि का व्यवधान दूर होने पर इन परियोजनाओं को सार्वनिक-निजी भागीदारी पर लागू किया जाएगा।