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लिथियम आयन बैटरी से ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में आएगा बदलाव

निजी क्षेत्र को मिलेगी इसरो की तकनीक
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लिथियम आयन बैटरी से ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में आएगा बदलाव

बेंगलूरु. उपग्रहों में इस्तेमाल की जाने वाले लिथियम आयन बैटरी के वाणिज्यिक उत्पादन से देश में ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे। इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने यह तकनीक निजी कंपनियों को हस्तांतरित करने का फैसला किया है। हाल ही में इस तकनीक को हासिल करने के लिए रुचि दिखाने वाली 141 कंपनियों का सम्मेलन विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) में आयोजित किया गया, जिसमें 190 प्रतिनिधियों ने शिरकत की।

इस अवसर पर वीएसएससी के निदेशक एस. सोमनाथ ने कहा कि लिथियम आयन बैटरी तकनीक में हुई उन्नति ने इसे इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पसंदीदा विकल्प बना दिया है। लिथियम आयन बैटरी हाई वोल्टेज, उच्च ऊर्जा घनत्व और लंबी अवधि के लिए उपयोगी होने के साथ ही इलेक्ट्रो-रसायन ऊर्जा भंडारण क्षमता के कारण काफी उपयोगी साबित हो रहा है। इलेक्ट्रोनिक उपकरणों के अलावा, दूर संचार और औद्योगिक अनुप्रयोगों जैसे एयरोस्पेस आदि में लिथियम आयन बैटरी की काफी मांग है। निजी क्षेत्र को यह तकनीक हस्तांतरित करने के बाद देश के ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा।

उन्होंने कंपनियों से कहा कि बाजार की जरूरतों के मुताबिक इस तकनीक में आवश्यक सुधार करें ताकि हर प्रकार की आवश्यकताएं पूरी की जा सके। उन्होंने कहा कि वीएसएससी ने अंतरिक्ष मिशनों के लिए लिथियम-आयन बैटरी का सफलतापूर्वक विकास किया है, जिसका उपयोग हो रहा है। इस बैटरी के अनुप्रयोगों का दायरा तब और बढ़ गया जब 50 एएच और 100 एएच क्षमता वाली लिथियम आयन बैटरी मोटर वाहनों में कारगर साबित हुई। इसरो 1.5 एम्पीयर से लेकर 100 एम्पीयर क्षमता तक की लिथियम बैटरी का उत्पादन अंतरिक्ष कार्यक्रमों के उपयोग के हिसाब से करता है।

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केएसओयू की मान्यता बहाल
बेंगलूरु. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने गुरुवार को कर्नाटक राज्य मुक्त विश्वविद्यालय की मान्यता बहाल कर दी। वर्ष 2018-19 से 2022-23 तक के लिए दूरस्थ शिक्षा के तहत 17 पाठ्यक्रमों के लिए मंजूरी मिली है। पिछले पांच साल (2013-14) से विवि को दूरस्थ शिक्षा के लिए मान्यता नहीं मिल पा रही थी।