तो यह चौमासा तमाशा बन जाता है
बेंगलूरु. शांतिनगर जैन श्वेतामबर मूर्ति पूजक संघ में आचार्य महेंद्र सागर सूरी ने कहा कि वादक और गायक में परस्पर तालमेल होना जरूरी होता है। दोनों में तालमेल होने पर ही संगीत में रस आता है। संगीत में रस आने पर ही तन व मन झूम उठता है। उन्होंने कहा कि यदि दोनों में तालमेल न हुआ तो वह संगीत शोरगुल बनकर रह जाता है। चातुर्मास को एक माह पूरा हो रहा है दिन-ब-दिन बीतते जा रहे हैं। हर कोई तप, जप, स्वाध्याय, सामायिक, ध्यानादि में लगा है। इसका कारण यही है कि संघ में साधु, ट्रस्टी और श्रावक-श्राविकाओं का, युवाओं और वृद्धों का तालमेल बैठ गया है। यदि इन सब में तालमेल बिगड़ जाए तो यह चौमासा तमाशा बन जाता है। संगीत में आनंद चाहिए तो गायक व वादक में तालमेल हो।
भगवान बनना है तो अहंकार से बचें
बेंगलूरु. राजाजीनगर में साध्वी संयमलता ने कहा कि अहंकार मृत्यु है और समर्पण मुक्ति है। अहंकार शून्य की ओर ले जाता है और समर्पण पूर्ण की ओर। कुतर्क नर्क है, समर्पण स्वर्ग है। उन्होंने कहा कि भगवान बनना है तो अहंकार से बचें। अहंकार ही आत्मा और परमात्मा के बीच में दीवार का काम करता है। अभिमान नहीं, स्वाभिमान में जिएं। दूसरों को सम्मान वही दे सकता है, जो अहम से रहित हो, विनय और समर्पण भाव से परिपूर्ण हो। हम भी मृदु बनें, विनम्र बनें। साध्वी कमलप्रज्ञा ने कहा कि हाथ की रेखाओं से भाग्य का निर्माण नहीं होता, भाग्य का निर्माण पुरुषार्थ से होता है। मां पद्मावती एकासना हुई, जिसमें 300 से अधिक श्रावकों ने भाग लिया। साध्वी कमलप्रज्ञा ने एकासना की विधि करवाई। शनिवार को सजोड़े भाई-बहन के अनुष्ठान होंगे।
भक्तामर का गुणगान
बेंगलूरु. चिकपेट स्थित आदिनाथ भगवान के आराधना भवन में जैविन जैन ने पंन्यास प्रवर व साध्वी मैत्री रत्ना की निश्रा में भक्तामर पर प्रकाश डाला और विधि-विधान समझाया।